वाशिंगटन, (उत्तराखण्ड तहलका): अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) द्वारा 19 नवंबर 2025 को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया गया है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार के इतिहास में एक बड़े विवर्तन (U-Turn) के रूप में देखी जा रही है। इस रिपोर्ट ने दशकों से चले आ रहे उस दावे को चुनौती दी है, जो कहता था कि 'वैक्सीन से ऑटिज़्म नहीं होता' (Vaccines do not cause autism)। रिपोर्ट के अनुसार, अब यह कथन वैज्ञानिक साक्ष्य पर आधारित नहीं माना गया है, जिसके कारण अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) ने ऑटिज़्म के कारणों की व्यापक जाँच शुरू कर दी है।

​परिभाषाएँ: संदर्भ को समझना

​किसी भी गंभीर मामले को समझने के लिए, हमें इसमें शामिल प्रमुख संस्थाओं और विषय-वस्तु की स्पष्ट समझ होनी चाहिए:

​1. ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD)

​ऑटिज़्म दिमाग के विकास से जुड़ी एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है। यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के सूचनाओं को संसाधित (process) करने का एक अलग तरीका है।

  • प्रमुख लक्षण: ऑटिज़्म से प्रभावित व्यक्ति को अक्सर दूसरों के साथ सामाजिक मेल-जोल (Social Interaction) और बातचीत (Communication) में कठिनाई होती है।
  • स्पेक्ट्रम: इसे 'स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि हर व्यक्ति में इसके लक्षण, गंभीरता और प्रभाव अलग-अलग होते हैं। कुछ बच्चों को हल्की सहायता की आवश्यकता होती है, जबकि अन्य को जीवनभर गहन समर्थन की आवश्यकता होती है।
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​2. CDC (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन)


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​CDC अमेरिका की सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी है। इसका मुख्य कार्य देश और विदेश में स्वास्थ्य खतरों को रोकना, स्वास्थ्य डेटा की निगरानी करना और वैज्ञानिक आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देश जारी करना है। दुनिया भर में इसके निर्णय और सूचना को चिकित्सा जगत में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

​3. HHS (हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज)

​HHS अमेरिकी सरकार का स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग है, जो एक संघीय कार्यकारी विभाग के रूप में कार्य करता है। यह CDC का जनक संगठन (Parent Department) है। HHS अमेरिका में सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक सेवाएँ और चिकित्सा अनुसंधान संबंधी नीतियों के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च सरकारी निकाय है।

​ऐतिहासिक नीति में विवर्तन: CDC का चौंकाने वाला खुलासा

​CDC की 19 नवंबर 2025 की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह स्वीकार किया गया है कि "वैक्सीन से ऑटिज़्म नहीं होता" वाला दावा अब 'साक्ष्य-आधारित दावा' नहीं है।

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डेटा क्वालिटी एक्ट (DQA) का पालन: रिपोर्ट के अनुसार, यह वेबपेज डेटा क्वालिटी एक्ट (DQA) की आवश्यकताओं के तहत अपडेट किया गया है। DQA संघीय एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करता है कि वे जनता को जो भी जानकारी प्रदान करें, वह गुणवत्तापूर्ण, वस्तुनिष्ठ (objective), उपयोगी और विश्वसनीय हो। CDC ने स्वीकार किया कि उनका पुराना, निरपेक्ष (absolute) दावा इस अधिनियम का उल्लंघन कर रहा था।

टीके के डर को रोकने की स्वीकारोक्ति: रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि पिछले दावे को ऐतिहासिक रूप से CDC और अन्य संघीय स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा इसलिए प्रसारित किया गया था ताकि टीकाकरण के प्रति हिचकिचाहट (Vaccine Hesitancy) को रोका जा सके। इस स्वीकारोक्ति से यह स्पष्ट होता है कि एजेंसी ने वैज्ञानिक सत्य को पूरी तरह से स्थापित किए बिना, सार्वजनिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के उद्देश्य से एक नीतिगत बयान जारी किया था।

कोर स्टेटमेंट: रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष में कहा गया है कि "वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस संभावना को खारिज नहीं किया है कि शिशु टीके ऑटिज़्म के विकास में योगदान दे सकते हैं।" यही वह कथन है जो पिछले सभी आधिकारिक बयानों को पलट देता है।

​विज्ञान की स्थिति: साक्ष्य का अपर्याप्त होना

​रिपोर्ट में विशिष्ट टीकों के संबंध में वैज्ञानिक साक्ष्य की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जो इस बात पर जोर देता है कि ऑटिज़्म का कारण बनने की संभावना को 'खारिज' नहीं किया गया है।

​1. शिशु टीकों पर अपर्याप्त साक्ष्य (Infant Vaccines)

​रिपोर्ट में उन सात शिशु टीकों (DTaP, HepB, Hib, IPV, PCV, रोटावायरस और इन्फ्लूएंजा) का उल्लेख किया गया है जिनकी 20 खुराक बच्चे को एक साल की उम्र से पहले दी जाती है। रिपोर्ट कहती है कि अभी भी ऐसे कोई अध्ययन नहीं हैं जो इस विशिष्ट दावे का समर्थन करते हों कि इनमें से कोई भी टीका ऑटिज़्म का कारण नहीं बनता।

  • पिछली समीक्षाएँ: नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन (IOM) और एजेंसी फॉर हेल्थकेयर रिसर्च एंड क्वालिटी (AHRQ) की पिछली समीक्षाओं का हवाला दिया गया है। इन समीक्षाओं ने DTaP और अन्य शिशु टीकों के संबंध में निष्कर्ष निकाला था कि उनके और ऑटिज़्म के बीच कारण संबंध को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए साक्ष्य अपर्याप्त (inadequate) हैं।
  • 1986 के अधिनियम की पृष्ठभूमि: रिपोर्ट में याद दिलाया गया कि 1986 के 'राष्ट्रीय बचपन वैक्सीन चोट अधिनियम' ने कांग्रेस को पर्टुसिस (pertussis) युक्त टीकों और ऑटिज़्म के बीच संबंध की जाँच करने का निर्देश दिया था। IOM ने 1991 और 2012 में लगातार पाया कि "कारण संबंध को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए अपर्याप्त साक्ष्य हैं।" CDC का यह नया रुख इन्हीं पिछली शोध सीमाओं को मान्यता देता है।

​2. MMR वैक्सीन और पद्धतिगत सीमाएँ

​MMR (मीजल्स, मम्प्स, रूबेला) वैक्सीन पर ऑटिज़्म को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं। CDC की रिपोर्ट स्वीकार करती है कि अवलोकन संबंधी साक्ष्यों (observational evidence) के आधार पर उच्च साक्ष्य शक्ति के साथ कोई संबंध नहीं पाया गया है।

  • शोध की आलोचना: हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि IOM की 2012 की समीक्षा में शामिल अधिकांश MMR-ऑटिज़्म अध्ययनों में "गंभीर पद्धतिगत सीमाएँ" (serious methodological limitations) थीं और उन्हें 'कोई भार नहीं' दिया गया था। इसके अलावा, ये सभी अध्ययन पूर्वव्यापी महामारी विज्ञान अध्ययन (retrospective epidemiological studies) थे, जो केवल सहसंबंध (correlation) बता सकते हैं, कारण (causation) सिद्ध नहीं कर सकते।

​जैविक तंत्रों और एल्युमिनियम पर बल

​रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक भाग वह है जो जैविक तंत्रों (Biologic Mechanisms) की जाँच की मांग करता है।

1. एल्युमिनियम एडजुवेंट्स (Aluminum Adjuvants):

CDC की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ऑटिज़्म की व्यापकता में वृद्धि, शिशुओं को दी जाने वाली टीकों की संख्या में वृद्धि के साथ मेल खाती है। विशेष रूप से, रिपोर्ट टीकों में इस्तेमाल होने वाले एल्युमिनियम एडजुवेंट्स पर ध्यान केंद्रित करती है।

  • ​एक विश्लेषण का हवाला दिया गया है जिसमें पाया गया है कि टीकों में एल्युमिनियम एडजुवेंट्स का ऑटिज़्म की व्यापकता में वृद्धि के साथ उच्चतम सांख्यिकीय सहसंबंध था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सहसंबंध कारण सिद्ध नहीं करता, लेकिन यह "आगे के अध्ययन का पात्र" है।
  • ​रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2019 CDC वैक्सीन अनुसूची के परिणामस्वरूप 18 महीने की उम्र तक 4.925 मिलीग्राम एल्युमिनियम का कुल जोखिम होता है, और डेनिश अध्ययनों में एल्युमिनियम के संपर्क और एस्पर्जर सिंड्रोम के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध पाया गया है।

2. अन्य तंत्रों की जाँच:

HHS अब उन तंत्रों का मूल्यांकन करेगा जिनकी पहले पर्याप्त जाँच नहीं की गई थी, जिनमें शामिल हैं:

  • ​एल्युमिनियम एडजुवेंट्स का प्रभाव।
  • ​माइक्रोकोंड्रियल विकारों वाले बच्चों के लिए जोखिम।
  • ​न्यूरोइन्फ्लेमेशन (मस्तिष्क की सूजन) के कारण होने वाले नुकसान।

​भारत पर इस रिपोर्ट के संभावित गहरे प्रभाव

​चूंकि CDC दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक वैश्विक मानक माना जाता है, इसलिए इसकी नीति में आया यह विवर्तन भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र, माता-पिता और नीति निर्माताओं के लिए गंभीर निहितार्थ रखता है:

​1. टीकाकरण अभियान और सार्वजनिक विश्वास का संकट

​भारत में टीकाकरण अभियानों (जैसे मिशन इंद्रधनुष) की सफलता सार्वजनिक विश्वास पर टिकी है। CDC के इस स्वीकारोक्ति से, भारत के लाखों माता-पिता, जो पहले से ही टीकों को लेकर संशय में थे, सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह पर अपना विश्वास खो सकते हैं। यह संभावित रूप से रूटीन बाल टीकाकरण (Routine Immunization) दर को कम कर सकता है, जिससे खसरा, पोलियो और डिप्थीरिया जैसी गंभीर बीमारियों के प्रकोप का खतरा बढ़ सकता है।

​2. भारतीय स्वास्थ्य एजेंसियों पर दबाव

​अमेरिकी कार्रवाई के बाद, भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय (MoHFW), ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) और NTAGI (नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन) पर निम्नलिखित का तत्काल दबाव पड़ेगा:

  • स्वदेशी डेटा की मांग: भारतीय टीकों और ऑटिज़्म के बीच संबंध पर स्वदेशी (local) साक्ष्य जुटाने की मांग बढ़ेगी।
  • एल्युमिनियम की जाँच: CDC की रिपोर्ट में एल्युमिनियम एडजुवेंट्स पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारतीय नियामक संस्थाओं को भारतीय वैक्सीन फॉर्मूलेशन में एल्युमिनियम की मात्रा और उसके प्रभाव की समीक्षा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
  • संचार रणनीति में बदलाव: भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों को अब "कोई संबंध नहीं है" कहने के बजाय, एक पारदर्शी और संतुलित संचार रणनीति अपनानी होगी।

​3. कानूनी और सामाजिक चुनौतियाँ

​ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के माता-पिता के संगठन (Parent Advocacy Groups) इस रिपोर्ट को एक बड़ी जीत के रूप में देखेंगे। वे सरकारी सहायता, क्षतिपूर्ति (compensation) और ऑटिज़्म अनुसंधान के लिए अधिक धन की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा, भारत में वैक्सीन निर्माताओं या सरकार के खिलाफ कानूनी चुनौतियों (Medico-Legal Challenges) की संभावना भी बढ़ सकती है।

​निष्कर्ष और आगे की राह

​CDC की 19 नवंबर 2025 की रिपोर्ट यह घोषित नहीं करती कि वैक्सीन से ऑटिज़्म होता ही है, लेकिन यह निश्चित रूप से इस दावे को खारिज करती है कि वैक्सीन से ऑटिज़्म नहीं होता। यह वैज्ञानिक अनिश्चितता को ईमानदारी से स्वीकार करना है।

निष्कर्ष: इस रिपोर्ट के आधार पर, यह कथन कि "वैक्सीन से ऑटिज़्म नहीं होता," अब CDC के आधिकारिक रुख के अनुसार साक्ष्य-आधारित नहीं है, क्योंकि वैज्ञानिक रूप से संबंध की संभावना को नकारा नहीं गया है।

​भारत को इस अंतर्राष्ट्रीय विवर्तन से सबक लेते हुए, अपने टीकाकरण कार्यक्रमों की सुरक्षा और संचार में उच्चतम पारदर्शिता और वैज्ञानिक सटीकता सुनिश्चित करनी होगी, ताकि टीकों के प्रति विश्वास को पूरी तरह से टूटने से बचाया जा सके और साथ ही ऑटिज़्म के कारणों की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जा सके। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहाँ सुरक्षा और वैज्ञानिक सच्चाई को प्राथमिकता दी जाएगी।

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