बिलासपुर के मोहल्ला हुरमत नगर टांडा में जल निकासी की जर्जर व्यवस्था स्थानीय निवासियों के लिए न केवल असुविधा बल्कि जान का जोखिम भी बन गई है। शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान तहसील दिवस में मोहल्लेवासियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि मोहल्ले की जल निकासी के लिए बनाई गई गूल वर्तमान में दोनों ओर से बंद पड़ी है। पूर्व में नगर पालिका द्वारा इस गूल का आंशिक निर्माण कराया गया था, लेकिन कार्य को बीच में ही छोड़ देने के कारण अब यह पूरे क्षेत्र के लिए मुसीबत का सबब बन चुकी है। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ है।

पुरानी त्रासदी और शिक्षा पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव
मोहल्लेवासियों का दर्द उस समय छलक उठा जब उन्होंने एक हृदय विदारक घटना का जिक्र किया। ग्रामीणों ने बताया कि इसी खुली गूल में डूबने से एक चार वर्ष की मासूम बच्ची की जान जा चुकी है, लेकिन इस बड़ी त्रासदी के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। गूल के कारण मुख्य मार्ग पूरी तरह प्रभावित है, जिससे स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और राहगीरों को हर समय दुर्घटना का भय सताता रहता है। मोहल्ले की नालियां और सड़कें भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जिससे हल्का सा जलभराव भी पूरे रास्ते को दलदल में तब्दील कर देता है और लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और ग्रामीणों का कड़ा रुख
मोहम्मद इमरान, मेहंदी हसन के नेतृत्व में मोहल्लेवासियों द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए तहसील प्रशासन ने सख्त तेवर दिखाए हैं। तहसील दिवस के प्रभारी अधिकारी उपजिलाधिकारी ने संबंधित विभाग को निर्देशित किया है कि इस समस्या का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सात दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए और इसकी विस्तृत आख्या कार्यालय में प्रस्तुत की जाए। हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस बार भी केवल कागजी खानापूर्ति की गई और गूल व सड़कों का पक्का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। अब देखना यह है कि सात दिन की समय सीमा में प्रशासन इस खूनी गूल से मोहल्लेवासियों को निजात दिला पाता है या नहीं।
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