उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने और अवैध टैक्सी स्टैंडों को शहर की सीमा से बाहर करने के लिए स्पष्ट शासनादेश संख्या 328 जारी किया था। इस आदेश का उद्देश्य शहर के यातायात को सुगम बनाना और आम नागरिक को जाम की समस्या से निजात दिलाना था। लेकिन बिलासपुर (रामपुर) में स्थिति इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। यहाँ मुख्यमंत्री के आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं और धरातल पर माफिया और दबंगों का कब्जा बरकरार है। प्रशासन की यह सुस्ती न केवल शासन की छवि को धूमिल कर रही है बल्कि आम जनता के धैर्य की परीक्षा भी ले रही है।

आम जनता के हक पर अतिक्रमण का प्रहार

​रामपुर रोड पर ज्ञानी जी के पंप से शनिवार बाजार की ओर जाने वाला मार्ग, जो कभी 30 फुट चौड़ा हुआ करता था, आज महज 10 फुट की संकरी गली में तब्दील हो गया है। डाकखाने के पीछे और मुख्य मार्ग के दोनों ओर अवैध रूप से खड़े वाहन राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन चुके हैं। यह रास्ता शहर की जीवनरेखा है, लेकिन अवैध टैक्सी संचालकों ने इसे अपनी जागीर समझ लिया है। स्थिति इतनी विकट है कि यहाँ पैदल चलना भी दूभर हो गया है और आए दिन लगने वाला लंबा जाम व्यापार और सामान्य जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार चुका है।

शिकायतों का अंबार और जिम्मेदारों की चुप्पी


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​हैरानी की बात यह है कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अमरीक सिंह चौहान ने पिछले चार वर्षों में दर्जनों बार समाधान दिवस में गुहार लगाई है। साल 2022 से लेकर 2026 तक लगातार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन तहसील और पुलिस प्रशासन ने शिकायतों को कूड़ेदान के हवाले कर दिया। जब कानून के रखवाले ही उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना करने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? प्रशासन की यह चुप्पी कहीं न कहीं अवैध स्टैंड संचालकों को मौन समर्थन देने की ओर इशारा करती है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद त्यागें और जनता को इस नरक से मुक्ति दिलाएं।

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