उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला कारागार से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने जेल प्रशासन और शासन की नींद उड़ा दी है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर, जो वर्तमान में इसी जेल में निरुद्ध हैं, उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की बात सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जेल परिसर के भीतर उनके आवासीय कक्ष के ठीक बाहर एक कंप्यूटर से टाइप किया गया पत्र और उसके साथ एक पत्थर पड़ा हुआ मिला है। इस पत्र में अत्यंत अभद्र और अश्लील भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें जान से मारने की स्पष्ट चेतावनी दी गई है। एक उच्च सुरक्षा वाली जेल के भीतर इस तरह की सामग्री का पहुंचना न केवल आश्चर्यजनक है बल्कि यह जेल के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार या गहरी लापरवाही की ओर भी इशारा करता है।

​अधिवक्ता की मुलाकात में हुआ सनसनीखेज खुलासा

​इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 16 जनवरी 2026 को सिविल कोर्ट देवरिया के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी जेल में अमिताभ ठाकुर से मिलने पहुंचे। मुलाकात के दौरान अधिवक्ता ने पाया कि अमिताभ ठाकुर काफी डरे हुए और मानसिक तनाव में थे। उन्होंने अधिवक्ता को बताया कि जेल के भीतर उनके साथ कुछ भी अनहोनी हो सकती है। उनके बैरक के पास मिला धमकी भरा पत्र साधारण नहीं है क्योंकि वह कंप्यूटर से टाइप किया गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि जेल के भीतर संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है या बाहर से कोई सामग्री योजनाबद्ध तरीके से अंदर भेजी गई है। पत्र के साथ रखा गया पत्थर इस खतरे को और अधिक पुख्ता करता है कि यह केवल एक चेतावनी नहीं बल्कि हमले की तैयारी हो सकती है।

​जेल की आंतरिक सुरक्षा और तंत्र पर खड़े हुए सवाल


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​यह घटना देवरिया जिला कारागार के सुरक्षा तंत्र की पोल खोलती नजर आ रही है। जेल एक ऐसा स्थान माना जाता है जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, लेकिन वहां एक हाई-प्रोफाइल बंदी के कमरे तक धमकी भरा पत्र पहुंच जाना गंभीर चूक है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जेल के अंदर कंप्यूटर और प्रिंटर की सुविधा तक किसकी पहुंच थी? क्या जेल प्रशासन के किसी कर्मचारी की मिलीभगत से इस कृत्य को अंजाम दिया गया है? अमिताभ ठाकुर एक पूर्व पुलिस अधिकारी रहे हैं जिन्होंने हमेशा सत्ता और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है। फिलहाल अमिताभ ठाकुर ने जेल अधीक्षक को इस बारे में सूचित कर अपनी जान के खतरे की बात कही है।

​आज़ाद अधिकार सेना ने की तत्काल कार्यवाही की मांग

​इस घटना के सामने आने के बाद आज़ाद अधिकार सेना ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन और न्यायिक हिरासत में एक व्यक्ति के जीवन के अधिकार पर हमला है। संगठन ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि जेल की दीवारों के भीतर इस धमकी के पीछे कौन से चेहरे छिपे हैं। इसके साथ ही अमिताभ ठाकुर की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बढ़ाने और यदि आवश्यक हो तो उन्हें किसी सुरक्षित जेल में स्थानांतरित करने की भी वकालत की गई है। 

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