रुद्रपुर, 06 नवंबर। काशीपुर रोड स्थित शारदा नगर के भानु प्रताप पब्लिक स्कूल में प्रकाश पर्व दिवाली बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। त्योहार को लेकर स्कूल के छात्र-छात्राओं और अध्यापकों में सुबह से ही खास रौनक देखने को मिली। पूरे विद्यालय परिसर को पारंपरिक दीयों, फूलों की मालाओं, रंगीन कागजों और खूबसूरत लाइटों से बहुत ही सलीके से सजाया गया था। इस मनमोहक सजावट ने पूरे स्कूल में उत्सव का उल्लास बिखेर दिया और हर तरफ खुशी का माहौल नजर आया।
छात्रों की कलात्मक प्रतिभा ने जीता दिल
विद्यालय में नर्सरी से लेकर 11वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के लिए कक्षा-वार विभिन्न कला व शिल्प प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन रचनात्मक गतिविधियों में बच्चों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने पर्यावरण का विशेष ध्यान रखते हुए अपने हाथों से मिट्टी के सुंदर दीये और भगवान गणेश की मनभावन प्रतिमाएं बनाईं। इसके अलावा परिसर में फूलों की रंगोली, थाली सजावट, दीया-होल्डर, हस्तनिर्मित लैंप, दीवार सजाने वाली लटकनें और 3D दीये तैयार किए। विद्यार्थियों ने घर में बेकार पड़ी सामग्री, कागज, मिट्टी और ताजे फूलों के जरिए खूबसूरत सजावटी वस्तुएं बनाकर अपनी प्रतिभा दिखाई।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा प्रांगण
उत्सव के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांध दिया। स्कूल के छात्रों ने 'राम आएंगे' गीत की सुरीली धुन पर भक्तिमय गायन प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को पावन बना दिया। इसके बाद यूकेजी के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने 'मेरे घर राम आए हैं' गीत पर मासूमियत भरे अंदाज में प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। वहीं कक्षा तीन के विद्यार्थियों ने 'केसरी के लाल' और कक्षा आठ की छात्राओं ने दिवाली के पारंपरिक गीतों पर सुंदर समूह नृत्य पेश किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कक्षा छह और नौ के विद्यार्थियों द्वारा किया गया गोवर्धन लीला का मंचन रहा, जिसे देखकर सभी ने तालियां बजाकर बच्चों का हौसला बढ़ाया। इसके साथ ही बच्चों ने रामायण की प्रेरक कथाएं सुनीं और शिक्षाप्रद वीडियो के माध्यम से इस पावन पर्व के सामाजिक व आध्यात्मिक महत्व को गहराई से समझा।
प्रधानाचार्य ने दिया प्रदूषण मुक्त दिवाली का संदेश
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य महेश चंद्रा ने सभी अध्यापकों और बच्चों को दिवाली की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने सफल आयोजन के लिए शिक्षकों के परिश्रम और विद्यार्थियों की लगन की दिल खोलकर सराहना की। बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि दिवाली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का उजाला फैलाने का दिन है। उन्होंने प्राचीन संदेश 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' को याद दिलाते हुए बच्चों को आलस्य छोड़कर मेहनत करने, गुस्से की जगह दया भाव रखने और मन में आत्मविश्वास जगाने की सीख दी। साथ ही उन्होंने सभी से तेज आवाज और प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों से दूर रहकर पर्यावरण के अनुकूल सादगी भरी दिवाली मनाने की अपील की।
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