भानु प्रताप पब्लिक स्कूल के प्रांगण में होली के पावन अवसर पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जहाँ परंपरा और आधुनिक उत्साह का अद्भुत मेल था। नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के नन्हे-मुन्ने और किशोर विद्यार्थियों ने इस उत्सव में अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी। कार्यक्रम की शुचिता को बनाए रखते हुए विद्यालय के प्रिंसिपल महेश चन्द्रा ने माँ सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलित कर समारोह का श्रीगणेश किया। उनके उद्बोधन में ज्ञान और विवेक की महत्ता के साथ-साथ त्योहारों के सामाजिक ताने-बाने को समझने की गहराई भी दिखाई दी। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर व्याप्त बुराइयों को जलाकर प्रेम और सद्भावना के नए रंग भरने का समय है।

सुरक्षित होली और प्राकृतिक रंगों का संदेश

प्रिंसिपल महेश चन्द्रा ने अपने संबोधन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और व्यक्तिगत सुरक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने वर्तमान समय की आवश्यकता को समझते हुए विद्यार्थियों को रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे केवल हर्बल और प्राकृतिक रंगों का ही चयन करें ताकि प्रकृति और स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें। उनके शब्दों ने न केवल छात्रों को बल्कि वहां मौजूद समस्त स्टाफ को भी एकता और भाईचारे के साथ मर्यादित उत्सव मनाने की प्रेरणा दी। यह संदेश विद्यालय की उस सोच को दर्शाता है जहाँ शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का भी समावेश किया जाता है।

मंच पर प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रदर्शन

​मनीषा मैम के कुशल मार्गदर्शन और निरंतर प्रयासों का फल विद्यार्थियों के प्रदर्शन में साफ झलक रहा था। कक्षा पांच से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों ने जिस परिपक्वता और आत्मविश्वास के साथ मंच की कमान संभाली, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सौम्या, स्वाति, जीविका, मिताली, अर्ना, तुरनिमा, आराध्या, अभिनव, चिराग और लवी जैसे जूनियर छात्रों ने अपनी वाकपटुता का लोहा मनवाया। वहीं आलिया, वानिया, रिद्धि और पावनी जैसी वरिष्ठ छात्राओं ने कार्यक्रम के प्रवाह को अपनी गरिमामय उपस्थिति से नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। इन छात्रों की प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि भानु प्रताप पब्लिक स्कूल अपने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उनके व्यक्तित्व निखार के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

नृत्य की लय और उल्लास का वातावरण

​सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में नृत्य का सत्र सबसे अधिक ऊर्जावान रहा। नृत्य शिक्षक अनुराग सर के कुशल निर्देशन में तैयार की गई विभिन्न नृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया। संगीत की धुनों पर थिरकते विद्यार्थियों के कदमों ने हर किसी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इसके उपरांत, औपचारिक कार्यक्रम का समापन होते ही विद्यालय परिसर एक जीवंत रंगमंच में बदल गया। सबसे पहले छात्राओं के विभिन्न समूहों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी, जिसके बाद छात्रों ने भी उसी सौहार्द और मर्यादा के साथ उत्सव में हिस्सा लिया। चारों ओर गूंजता संगीत, हवा में उड़ते रंग और खिलखिलाते चेहरे इस बात के गवाह बने कि यह आयोजन आपसी मेलजोल और खुशी का एक अविस्मरणीय अध्याय बन गया है।


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