भानु प्रताप पब्लिक स्कूल के प्रांगण में बीते दिनों एक अत्यंत गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसने विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में नई ऊर्जा का संचार कर दिया। शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में आयोजित 'भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा' के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ पारंपरिक मूल्यों का समावेश विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में निखार लाने के लिए अनिवार्य है। इस परीक्षा के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने न केवल अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि भारतीय गौरव, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति के प्रति अपनी गहरी समझ को भी प्रदर्शित किया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं की इस सामूहिक सफलता ने संपूर्ण क्षेत्र में संस्थान का मान बढ़ाया है।

मेधावी विद्यार्थियों की स्वर्णिम सफलता और सम्मान

समारोह के दौरान विभिन्न कक्षाओं के होनहार विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि के लिए मंच पर सम्मानित किया गया। कक्षा पांच से मयंक कंदारी, सहजदीप सिंह, आयुष राज, प्रियांशी शुक्ला, श्रेयांश शुक्ला, तनिष्का, इशांत, साक्षी, अरना नेगी, चिराग, मिताली, जीविका चंद्रा और भाव्या सिंह ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया। इसी क्रम में कक्षा छह से आयुष्मान, अवनीत प्रत्यूषा, हिमाचल, अतुल्या, आरोही, वैष्णवी और राघव ने उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किया। कक्षा सात के विद्यार्थियों में शेखर, दीपक और तन्मय सिंह ने सफलता का परचम लहराया, जबकि कक्षा आठ से वैभव, होना, वसुंधरा, आशुतोष, भावेश, आयुषी और स्नेहा ने अपनी प्रतिभा को सिद्ध किया। उच्च कक्षाओं में कक्षा नौ से श्रेया चौरसिया और कक्षा दस से निखिल सिंह व सिद्धांत शर्मा ने अपनी लगन और परिश्रम से विद्यालय परिवार को गौरवान्वित किया।

प्रबंधक द्वारा चरित्र निर्माण और राष्ट्रप्रेम का आह्वान

समारोह के मुख्य अतिथि एवं विद्यालय के संचालक महेश चंद्रा ने अपने ओजस्वी संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन के वास्तविक लक्ष्यों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की सार्थकता केवल अंकतालिका प्राप्त करने में नहीं, बल्कि एक चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बनने में निहित है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा जैसे आयोजन विद्यार्थियों के भीतर छिपी राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करते हैं और उन्हें अनुशासन व सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने विजेता छात्र-छात्राओं को विशेष प्रशस्ति-पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। विद्यालय के उपाध्यक्ष ने भी सभी सफल प्रतिभागियों को अपना स्नेहिल आशीर्वाद प्रदान किया और उनके निरंतर विकास की कामना की।

शिक्षिकाओं का अतुलनीय मार्गदर्शन और सामूहिक संकल्प

इस गौरवशाली उपलब्धि के पीछे विद्यालय के हिंदी विभाग की शिक्षिकाओं का अथक परिश्रम और समर्पण छिपा है। आरती मैम, संगीता मैम, कीर्ति भटनागर और मंजू मैम के कुशल मार्गदर्शन ने विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए मानसिक और नैतिक रूप से तैयार किया। समारोह में उनके इस विशेष योगदान को सराहा गया और उन्हें सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रबंधन और शिक्षक वृंद ने सामूहिक संकल्प लिया कि संस्थान भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक और संस्कारपरक आयोजनों को प्राथमिकता देगा। यह समारोह विद्यार्थियों के लिए मात्र पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर नहीं था, बल्कि यह उनके भीतर अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा का एक नया अध्याय बनकर उभरा।


Advertisement

---समाप्त---