उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर अंतर्गत बिलासपुर के गांव डिबडिबा स्थित भानु प्रताप पब्लिक स्कूल ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई इबारत लिखते हुए 'कक्षाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग' विषय पर एक विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया है। सीबीएसई के देहरादून सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने शिक्षकों को तकनीक और शिक्षा के तालमेल की एक नई दिशा दिखाई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को उन डिजिटल दक्षताओं से लैस करना है, जो आने वाले समय में शिक्षण के पारंपरिक तरीकों को बदलने वाली हैं।
विशेषज्ञों का नया दृष्टिकोण और डिजिटल शिक्षण
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का नेतृत्व क्षेत्र के दो अनुभवी विशेषज्ञों, श्री अभिनव चौधरी और श्री विकास घवरी ने किया। इन संसाधन व्यक्तियों ने अत्यंत सरल और पेशेवर तरीके से एआई जैसी जटिल अवधारणाओं को शिक्षकों के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य शिक्षकों की जगह लेना नहीं है, बल्कि उनके काम को और अधिक प्रभावशाली और आसान बनाना है। विशेषज्ञों ने लाइव प्रदर्शन के माध्यम से दिखाया कि कैसे एआई टूल्स की मदद से पाठ योजना तैयार करना, छात्रों का मूल्यांकन करना और व्यक्तिगत सीखने की क्षमता को विकसित करना संभव है। इस दौरान शिक्षकों ने न केवल तकनीक को समझा बल्कि उसे कक्षा के व्यावहारिक माहौल में अपनाने के गुर भी सीखे।
आधुनिक तकनीक और स्कूल की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री महेश चंद्रा द्वारा अतिथियों के आत्मीय स्वागत के साथ हुई। उन्होंने विशेषज्ञों को पौधे भेंट कर प्रकृति और विकास के प्रति स्कूल की सोच को प्रदर्शित किया। अपने संबोधन में प्रधानाचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि भानु प्रताप पब्लिक स्कूल पहले से ही अपने शिक्षण ढांचे में एआई आधारित प्रणालियों को शामिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि शिक्षक और छात्र दोनों ही भविष्य की इन तकनीकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। प्रधानाचार्य ने सीबीएसई देहरादून का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक संवाद के लिए उनके स्कूल को केंद्र के रूप में चुना।
बेहतर समन्वय और प्रेरणादायक समापन
पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में सुश्री मनीषा और सुश्री कोमल की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने बड़ी ही शालीनता और अनुशासन के साथ मंच का प्रबंधन किया। कार्यशाला में मौजूद शिक्षकों का उत्साह देखते ही बनता था। सहभागी शिक्षकों ने स्वीकार किया कि इस सत्र के बाद वे कक्षाओं में अधिक आत्मविश्वास के साथ एआई टूल्स का उपयोग कर सकेंगे। सत्र के अंत में यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया कि यदि एआई का उपयोग नैतिक और बुद्धिमानी से किया जाए, तो यह शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। यह आयोजन भानु प्रताप पब्लिक स्कूल की नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
---समाप्त---