बिलासपुर के माठखेड़ा रोड पर स्थित विख्यात भगवान महावीर नेत्र चिकित्सालय में आज सेवा और संवेदना का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। नगर के सुप्रतिष्ठित हकीम श्यामलाल जैन परिवार के मार्गदर्शक और वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय श्री कस्तूरचंद जी जैन की स्मृति में एक विशाल नेत्र चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया गया। महज 15 दिन पूर्व 90 वर्ष की आयु में अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करने वाले श्री कस्तूरचंद जी जैन का व्यक्तित्व सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहा। उनके परिवार ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनकी स्मृति में निशुल्क आंखों की जांच और ऑपरेशन का संकल्प लिया। गौरतलब है कि परिवार ने उनके निधन के तुरंत बाद नेत्रदान कर दो व्यक्तियों के जीवन के अंधेरे को दूर किया था, और आज यह कैंप उसी निस्वार्थ सेवा की एक अगली कड़ी है।

निशुल्क जांच और अत्याधुनिक तकनीक से सफल ऑपरेशन

इस विशेष कैंप में क्षेत्रीय नागरिकों का भारी उत्साह देखा गया, जहाँ अनुभवी नेत्र सर्जनों की टीम द्वारा कुल 110 मरीजों की गहन जांच की गई। परीक्षण के दौरान मोतियाबिंद से ग्रसित 31 मरीजों का चयन ऑपरेशन के लिए किया गया। अस्पताल प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इन सभी मरीजों की ऑपरेशन पूर्व की अनिवार्य जांचें जैसे रक्तचाप, मधुमेह, ए स्कैन और बी स्कैन पूरी तरह निशुल्क संपन्न की। चयन प्रक्रिया के तुरंत बाद ही सभी 31 मरीजों की आंखों में आधुनिक आईओएल लेंस डालकर उनके सफल ऑपरेशन किए गए। शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि रजिस्ट्रेशन से लेकर दवाइयों और लेंस प्रत्यारोपण तक की समस्त सुविधाएं संस्थान और जैन परिवार द्वारा पूर्णतः मुफ्त उपलब्ध कराई गईं।

मानव सेवा के 40 वर्ष और समर्पित टीम का सहयोग

अखिल भारतीय दिगम्बर जैन तरुण परिषद द्वारा संचालित यह चिकित्सालय पिछले 40 वर्षों से गरीब और असहाय तबके के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। संस्थान के अध्यक्ष संदेश जैन और स्वदेश जैन ने इस अवसर पर बताया कि संस्थान का एकमात्र ध्येय 'मानव सेवा ही माधव सेवा' है और परिषद समय-समय पर ऐसे आयोजन करती रहेगी। आज के इस पुनीत कार्य को सफल बनाने में डॉक्टर सत्यम गुप्ता, स्पर्श जैन, राज कुमार, मोहम्मद दानिश, वीरदेव, राहुल, ममता, रमन, नजाकत, सन्नी, अफजल, इमरान और दर्शन जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं एवं चिकित्सकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस आयोजन ने न केवल 31 परिवारों के जीवन में उजाला फैलाया है, बल्कि पूरे बिलासपुर क्षेत्र में परोपकार की एक नई अलख को जीवित रखा  है।


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