पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इन दिनों बारूद की गंध और गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा रहा है। बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने अपने 'ऑपरेशन हेरोफ' के दूसरे चरण का आगाज करते हुए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर ऐसा हमला बोला है जिसे बलूच भाषा में काला तूफान कहा जा रहा है। पिछले पांच दिनों से जारी इस खूनी संघर्ष ने न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की पोल खोल दी है बल्कि बलूच विद्रोहियों के बढ़ते दुस्साहस को भी दुनिया के सामने रख दिया है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने हुंकार भरते हुए दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने अलग-अलग मोर्चों पर पाकिस्तानी सेना, पुलिस और फ्रंटियर कोर को चारों खाने चित कर दिया है। उनके मुताबिक इस भीषण लड़ाई में अब तक 310 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं और सेना के कई ऑपरेशनों को पूरी तरह विफल कर दिया गया है।

दावों और आंकड़ों की खूनी जंग

​एक तरफ जहां विद्रोही संगठन अपनी जीत के कसीदे पढ़ रहा है वहीं पाकिस्तानी सेना का मीडिया विंग आइएसपीआर अपनी अलग ही कहानी बयां कर रहा है। पाकिस्तानी फौज का कहना है कि उन्होंने विद्रोहियों के मंसूबों को नाकाम करते हुए 216 लड़ाकों को मार गिराया है। हालांकि सेना ने अपने नुकसान को काफी कम करके बताया है और केवल 22 सैनिकों की मौत की बात स्वीकारी है। लेकिन जमीन से आ रही खबरें कुछ और ही मंजर पेश कर रही हैं। रॉयटर्स और अन्य स्वतंत्र सूत्रों की मानें तो हताहतों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है। इस आपाधापी में सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है जिनकी जान इस दोहरे संघर्ष के बीच फंसकर जा रही है। गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दर्जनों नागरिकों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है जो पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी सिरदर्द बन गया है।

बेकाबू होते हालात और घिरती सरकार


Advertisement

​ऑपरेशन हेरोफ का पहला चरण अगस्त 2024 में शुरू हुआ था लेकिन दूसरे चरण ने जिस तरह की तबाही मचाई है उसने इस्लामाबाद के हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है। बलूचिस्तान के कई इलाकों में बीएलए का नियंत्रण इस कदर बढ़ गया है कि वहां पाकिस्तानी प्रशासन और पुलिस पूरी तरह बेबस नजर आ रहे हैं। आतंक रोधी विभाग और सेना समर्थित समूहों के बीच समन्वय की कमी और लगातार हो रहे घातक हमलों ने सुरक्षाबलों के मनोबल को तोड़कर रख दिया है। यह लड़ाई अब सिर्फ हथियारों की नहीं बल्कि वर्चस्व की बन गई है। बीएलए का कहना है कि उनके सिर्फ 46 लड़ाके शहीद हुए हैं और वे पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है क्योंकि एक तरफ आर्थिक बदहाली है और दूसरी तरफ अपने ही घर में सुलगती विद्रोह की यह आग बुझने का नाम नहीं ले रही है।

---समाप्त---