पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान इस समय भीषण हिंसा की आग में झुलस रहा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा छेड़े गए 'ऑपरेशन हेरोफ' ने पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर डर का माहौल पैदा कर दिया है। पिछले 48 घंटों में जिस तरह से सिलसिलेवार धमाके और आत्मघाती हमले हुए हैं, उसने रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय की रणनीतियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विद्रोहियों ने न केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है बल्कि राजमार्गों पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे प्रांत का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से लगभग कट गया है।
आंकड़ों का विरोधाभास और जमीनी हकीकत
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती और केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। प्रशासन जहां भारी संख्या में उग्रवादियों को ढेर करने का दावा कर रहा है, वहीं बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने सैन्य जवानों को बंधक बनाने और दर्जनों फौजियों को मौत के घाट उतारने की बात कही है। इस खूनी खेल में आम नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ रही है। अस्पतालों और बाजारों में पसरा सन्नाटा इस बात की तस्दीक करता है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। उप गृह मंत्री तलाल चौधरी के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है, जिसमें उन्होंने विद्रोहियों द्वारा नागरिकों को ढाल बनाने की बात कही है।
विद्रोही गुटों की एकजुटता और रणनीतिक बदलाव
इस बार की लड़ाई अतीत के विद्रोहों से काफी अलग नजर आ रही है। यूनाइटेड बलूच आर्मी जैसे अन्य सशस्त्र समूहों ने भी बीएलए के अभियान को अपना समर्थन देकर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए मोर्चेबंदी कठिन कर दी है। बलूच नेताओं का मानना है कि अब वे किसी बाहरी महाशक्ति की मदद का इंतजार करने के बजाय अपनी लड़ाई खुद लड़ने के लिए तैयार हैं। कई पुलिस थानों पर कब्जे और बैंकों में हुई लूटपाट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विद्रोही इस बार लंबी जंग की तैयारी के साथ आए हैं। कमांडरों द्वारा जनता से सशस्त्र क्रांति में शामिल होने की अपील ने आग में घी डालने का काम किया है।
इस्लामाबाद के लिए पैदा हुआ अस्तित्व का संकट
आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के लिए बलूचिस्तान की यह चुनौती किसी बुरे सपने से कम नहीं है। एक तरफ देश आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है और दूसरी तरफ सबसे महत्वपूर्ण प्रांत हाथ से निकलता दिखाई दे रहा है। चीन के निवेश वाले प्रोजेक्ट्स और सीपेक की सुरक्षा पर भी अब खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। यदि समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया, तो पाकिस्तान के लिए अपने भौगोलिक अस्तित्व को बचाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी अब इस अशांत क्षेत्र पर टिकी हैं, क्योंकि यहां की अस्थिरता पूरे दक्षिण एशिया के समीकरण बिगाड़ सकती है।
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