नई दिल्ली (Uttarakhand Tehelka)Anti-Terror पर प्रहार- भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक अभूतपूर्व संयुक्त कार्रवाई में देश को दहलाने की दो बड़ी और भयावह आतंकी साज़िशों का पर्दाफाश किया है। इस वृहद Anti-Terror अभियान के तहत देश के विभिन्न हिस्सों से विस्फोटक, जैविक हथियार बनाने का सामान और एके-47 जैसे घातक हथियार भारी मात्रा में बरामद किए गए हैं। इस ऑपरेशन की सबसे चौंकाने वाली और चिंताजनक बात यह है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में दो डॉक्टर भी शामिल हैं, जो आतंकी नेटवर्क के स्लीपर सेल्स का हिस्सा थे और अपने पेशेवर ज्ञान का उपयोग राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में कर रहे थे।

फरीदाबाद में खतरनाक Anti-Terror खुफिया ऑपरेशन

​जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में एक महत्वपूर्ण और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम दिया। यहाँ से एक कश्मीरी डॉक्टर, जिसका नाम मुजाहिल शकील बताया जा रहा है, उसे हिरासत में लिया गया। सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर की निशानदेही पर फरीदाबाद में एक किराए के कमरे से लगभग 300 किलोग्राम आरडीएक्स (RDX), एक एके-47 राइफल, 84 कारतूस और 5 लीटर केमिकल बरामद हुआ है।

​यह विस्फोटक और हथियार एक ऐसे बड़े आतंकी हमले की ओर इशारा करते हैं जो देश की राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों को निशाना बना सकता था। सूत्रों ने बताया कि डॉक्टर ने तीन महीने पहले यह कमरा किराए पर लिया था और मकान मालिक को केवल सामान रखने की बात कही थी। पुलिस ने डॉक्टर की निशानदेही पर पहुंचकर 14 भारी बैग बरामद किए।

यह बड़ी RDX Recovery एक बड़े आतंकी हमले की योजना को विफल करती है, जो सुरक्षा एजेंसियों की सतर्क Anti-Terror कार्रवाई की सफलता को प्रमाणित करता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सीमा पार के आतंकी अब देश के आंतरिक हिस्सों में स्लीपर सेल्स के माध्यम से अपने खतरनाक इरादों को अंजाम देने की फिराक में हैं।


Advertisement

गुजरात एटीएस ने जैविक हथियार साज़िश पर किया Anti-Terror प्रहार

​इसी क्रम में, गुजरात एटीएस ने अहमदाबाद से एक डॉक्टर समेत तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर एक और बड़ी और अधिक खतरनाक आतंकी साज़िश को नाकाम किया है। ये संदिग्ध 'रिकिन' (Ricin) नामक अत्यंत विषैले जैविक जहर के माध्यम से देश में बड़ा हमला करने की योजना बना रहे थे।

यह भी पढ़ें: Alleged Terror Link का आरोप: पंजाब पुलिस ने हत्यारोपी को ‘प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा’ बताया, गहन जाँच शुरू

​एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी के अनुसार, Anti-Terror अभियान के तहत गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में तेलंगाना निवासी डॉक्टर अहमद मोहीउद्दीन सैयद, और यूपी के आजाद सुलेमान शेख तथा सुहैल शामिल हैं। उनके पास से तीन विदेशी पिस्तौल, 30 कारतूस और चार लीटर कैस्टर ऑयल बरामद हुआ है, जिसका उपयोग रिकिन नामक घातक जहर बनाने में होता है। रिकिन प्रोटीन बनने की प्रक्रिया को रोककर शरीर के अंगों को निष्क्रिय कर देता है।

चिकित्सा पृष्ठभूमि के व्यक्तियों का इस तरह की साज़िश में शामिल होना अत्यधिक चिंता का विषय है। इस सफल Anti-Terror ऑपरेशन ने दिखाया कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां अब केवल पारंपरिक खतरों से नहीं, बल्कि केमिकल और बायोलॉजिकल टेररिज्म के खतरे को भी प्रभावी ढंग से टाल रही हैं।

डॉक्टर आदिल कनेक्शन और Anti-Terror नेटवर्क की जाँच

​इन दो प्रमुख कार्रवाइयों के साथ, श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने वाले डॉ. आदिल का कनेक्शन भी एजेंसियां खंगाल रही हैं। Anti-Terror अभियान के तहत अनंतनाग निवासी डॉ. आदिल को सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था। उनके अनंतनाग स्थित घर से भी सर्च ऑपरेशन में एक एके-47 बरामद हुई थी। खुफिया विभाग की टीमें अब यह जांच कर रही हैं कि डॉ. आदिल का संबंध मुजाहिल शकील या अहमदाबाद के समूह से तो नहीं था।

​ये गिरफ्तारियाँ स्पष्ट करती हैं कि आतंकी समूह अपनी साज़िशों को अंजाम देने के लिए शहरी क्षेत्रों में स्लीपर सेल्स का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय से चलाया जा रहा यह Anti-Terror अभियान लगातार आतंकी मंसूबों को जड़ से उखाड़ने में कामयाब हो रहा है। देश की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम है, जिसने देश को बड़ी तबाही से बचाया है।

कितना खतरनाक है 'रिकिन' (Ricin)

गुजरात में गिरफ्तार आतंकियों के पास मिला रिसिन जहर कितना खतरनाक है ये इसी से अंदाजा लगे जा सकता है कि इसका कोई एंटीडोट या औषधि नहीं बनी है। दुनिया में इसकी कोई दवा नहीं है। इसे इंजेक्शन से खाने में या सांस के जरिये दिया जा सकता है।

रिसिन आसानी से बनाया जा सकने वाला सफेद पाउडर है। इसे इंजेक्शन से, खाने में मिलाकर या सांस के जरिये दिया जा सकता है। सांस के जरिये इसे देने का तरीका सबसे खतरनाक माना जाता है, जिससे एक ही समय में ज्यादा लोगों को निशाना बनाया जा सकता है। इसकी चपेट में आने से किसी व्यक्ति की 48 से 72 घंटे में मौत हो सकती है। खास यह है कि दुनिया में अभी तक इसका कोई एंटीडोट या औषधि नहीं बनी है। अरंडी के बीज में जहरीला प्रोटीन रिसिन पाया जाता है।

1.78 मिलीग्राम जान लेने के लिए काफी

रिसिन को खाना सबसे कम खतरनाक होता है। यदि सांस के जरिये शरीर में गया या फिर शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाए तो इसका हजारवें हिस्से जितनी मात्रा भी घातक हो सकती है। एक आम इंसान को मारने के लिए महज 1.78 मिलीग्राम रासिन काफी है।

ट्रंप और ओबामा पर भी हो चुका है Ricin अटैक  

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2020 में और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को 2013 में रिसिन जहर के जरिये जान से मारने की कोशिश की जा चुकी है। ओबामा को दो बार लिफाफों में यह जहर भेजा गया था। इस जहर को लिफाफे में खत पर पाउडर छिड़क कर भेजा गया था। रसिन का जासूसी और युद्ध में इस्तेमाल होता रहा है। इकोनॉमिक सर्वे से पता चला है कि दुनिया भर में हर साल 10 लाख टन से ज्यादा अरंडी के बीज तैयार होते हैं। वाणिज्यिक उत्पादन से लगभग 50,000 टन शुद्ध रिसिन मिल सकता है। रिसिन कमरे के तापमान पर बहुत स्थायी होता है।

अरंडी के बीज में होता है रिसिन

 अरंडी के बीज में जहरीला प्रोटीन रिसिन पाया जाता है। अरंडी के एक बीज में 5 से 10 प्रतिशत तक रिसिन हो सकता है। रिसिन जिस भी कोशिका के संपर्क में आता है, उसके अंदर प्रोटीन सिंथेसिस बंद कर देता है। इससे कोशिका मर जाती है। रिसिन शरीर की कोशिकाओं को संक्रमित करता है।

यह कोशिकाओं की प्रोटीन बनाने की क्षमता खत्म कर देता है। इसकी वजह से शरीर के बेहद जरूरी काम रुक जाते हैं। यदि व्यक्ति बच भी जाए तो कई अंग स्थायी रूप से बेकार हो जाते हैं। शोधों के मुताबिक, सिर्फ टीकाकरण ही रिसिन से मौत को रोकने में असरदार हो सकता है। रिसिन का शिकार होने के चार घंटे के अंदर इलाज मिल पाए तभी कुछ कारगर हो सकता है।

©2025उत्तराखंड तहलका/सभी अधिकार सुरक्षित

---समाप्त---