प्रयागराज (Uttarakhand Tehelka) उत्तर प्रदेश के Bareilly Violence मामले में वांछित चल रहे दो सगे भाइयों, नदीम खान और बबलू खान, को इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। न्यायालय ने पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) के तहत उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट का यह फैसला पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, जो इस मामले में लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा था।

​क्या है पूरा मामला?

​यह मामला बरेली में 26 सितंबर 2025 को जुमे की नमाज के बाद हुए उपद्रव और हिंसा से जुड़ा है। 'आई लव मोहम्मद' (I Love Muhammad) लिखे पोस्टरों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद जल्द ही पथराव और पुलिस के साथ झड़प में बदल गया। पुलिस ने इस मामले में कई एफआईआर दर्ज कीं, जिनमें बारादरी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी में नदीम खान और बबलू खान को मुख्य रूप से षड्यंत्र रचने और भीड़ को भड़काने का आरोपी बनाया गया।

Bareilly Violence के बाद पुलिस प्रशासन ने दंगाइयों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए अभियान चलाया था। पुलिस ने इन दोनों भाइयों पर ₹15,000 का नकद इनाम भी घोषित किया था, और दोनों को लगातार फ़रार बताया जा रहा था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बबलू खान एक सूचीबद्ध हिस्ट्रीशीटर भी है, जबकि नदीम खान पर पहले भी कई गंभीर आरोप दर्ज हैं। पुलिस ने उन्हें उपद्रव के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक बताया था।


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Allahabad High Court Stay का आधार

​गिरफ्तारी से बचने और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग को लेकर, Bareilly Violence आरोपी नदीम खान और बबलू खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

​अदालत ने पाया कि Bareilly Violence के आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई धाराओं में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, ऐसे मामलों में अभियुक्तों की गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, बल्कि जांच अधिकारी (IO) को पहले CrPC की धारा 41A के तहत नोटिस जारी करना चाहिए।

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​इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों भाइयों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह Interim Relief आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल होने तक जारी रहेगी। इसका अर्थ है कि पुलिस अभी इन दोनों भाइयों को गिरफ्तार नहीं कर सकती है, लेकिन जांच जारी रहेगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह राहत समाप्त हो सकती है। यह फैसला Bareilly Violence के आरोपियों को तत्काल राहत प्रदान करता है, जबकि पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति देता है।

​प्रशासन के लिए एक चुनौती

​इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई यह Interim Relief  उन Bareilly Violence के आरोपियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, जो पुलिस के सख्त अभियान के चलते फ़रार थे। यह फैसला योगी आदित्यनाथ सरकार की उस 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति के सामने एक कानूनी चुनौती भी पेश करता है, जिसके तहत हिंसा के आरोपियों पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की जा रही थी।

​इस इलाहाबाद हाईकोर्ट से Stay के बाद, बरेली पुलिस को अब नए कानूनी दांवपेंच अपनाने होंगे। पुलिस को आरोप पत्र दाखिल करने से पहले साक्ष्यों को और मजबूत करना होगा, ताकि न्यायालय में यह साबित किया जा सके कि इन दोनों Bareilly Violence Accused की गिरफ्तारी जांच और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक थी। यह घटना दर्शाती है कि कानून की प्रक्रिया में, किसी भी आपराधिक कार्रवाई को पूरी तरह से कानूनी मानकों के अनुसार ही अंजाम दिया जाना चाहिए, भले ही मामला कितना भी संवेदनशील क्यों न हो।

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