कनाडा के वैंकूवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के मुख्य पायलट को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। यह घटना उस वक्त की है जब विमान उड़ान भरने की अंतिम तैयारियों में था और यात्री अपनी सीटों पर बैठ चुके थे। चश्मदीदों और हवाई अड्डा सूत्रों के मुताबिक विमान के कॉकपिट में मौजूद क्रू मेंबर्स और सुरक्षा कर्मियों को पायलट के व्यवहार में कुछ असामान्यता महसूस हुई। जैसे ही सुरक्षा जांच अधिकारी विमान के भीतर पहुंचे उन्होंने पायलट के पास से शराब की तेज गंध महसूस की जिसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें विमान से नीचे उतार लिया गया। इस औचक कार्रवाई ने न केवल विमानन कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सबसे बड़ी सरकारी एयरलाइन की छवि को भी गहरा धक्का पहुंचाया है।
नियमों की धज्जियां और यात्रियों की परेशानी
विमानन क्षेत्र के कड़े नियमों के अनुसार किसी भी पायलट के लिए उड़ान से कम से कम बारह घंटे पहले तक शराब का सेवन वर्जित होता है। वैंकूवर में हुई इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों के पालन में कितनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही थी। जैसे ही पायलट को हिरासत में लिए जाने की खबर फैली विमान के भीतर बैठे यात्रियों में रोष और चिंता का माहौल पैदा हो गया। विमानन कंपनी ने शुरुआत में तकनीकी कारणों का हवाला दिया लेकिन बाद में यह स्पष्ट हो गया कि पायलट की चिकित्सकीय स्थिति और उनके रक्त में अल्कोहल की संभावित मात्रा ही इस पूरे गतिरोध की मुख्य वजह थी। यात्रियों को घंटों तक टर्मिनल पर इंतजार करना पड़ा जिससे एयर इंडिया की प्रबंधन क्षमता और संकटकालीन स्थिति से निपटने के तरीकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं।
कठोर कार्रवाई की ओर बढ़ते कदम
एयर इंडिया के प्रबंधन ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के मानकों के तहत यह एक अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है जिसमें पायलट का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है। कनाडा के स्थानीय अधिकारियों ने पायलट को शुरुआती पूछताछ के बाद चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा है ताकि इस बात की पुष्टि की जा सके कि उन्होंने उड़ान से कितनी देर पहले प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन किया था। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल यात्रियों की जान को जोखिम में डालती हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर एयरलाइन की विश्वसनीयता को भी शून्य कर देती हैं।
विमानन सुरक्षा पर गहराता संकट
यह पहली बार नहीं है जब एयर इंडिया के चालक दल के सदस्य इस तरह के विवादों में फंसे हों। पिछले कुछ वर्षों में शराब पीकर उड़ान भरने के प्रयासों की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है जो सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की ओर इशारा करती है। वैंकूवर की इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या पायलटों की प्री-फ्लाइट मेडिकल जांच की प्रक्रिया में कोई बड़ी खामी है। इस घटना के कारण वैंकूवर से भारत आने वाली उड़ान को रद्द करना पड़ा और यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों या होटलों में स्थानांतरित करने के लिए एयरलाइन को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं जो यह तय करेगी कि दोषी पायलट के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होगा या केवल विभागीय कार्रवाई तक ही सीमित रहा जाएगा।
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