उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से खाकी की वर्दी को दागदार करने वाली एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है जिसने पुलिसिया इकबाल और संवेदनशीलता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। किरावली में किसान के पैर तोड़े जाने की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि छत्ता थाना क्षेत्र की जीवनी मंडी पुलिस चौकी में बर्बरता का नया अध्याय लिख दिया गया। एक मासूम दूध विक्रेता नरेंद्र कुशवाह को सिर्फ इसलिए 'थर्ड डिग्री' दी गई क्योंकि उसे टेंपो चलाना नहीं आता था। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे जमीन पर लिटाकर पैरों के तलवों पर लाठियां भांजी और क्रूरता की इंतहा करते हुए उसका नाखून तक उखाड़ दिया। यह घटना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि रक्षक के भक्षक बनने की पराकाष्ठा है।
महज टेंपो न चला पाने की मिली इतनी खौफनाक सजा
सैंया के वीरई गांव का रहने वाला नरेंद्र अपने भाई धीरज के साथ घर-घर दूध पहुंचाने का काम करता है। घटना वाले दिन जब उसका भाई दूध बांटने गया था, तब नरेंद्र टेंपो के पास खड़ा था। इसी बीच किसी विवाद की सूचना पर पहुंचे चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार ने नरेंद्र को आदेश दिया कि वह पकड़े गए कुछ युवकों को टेंपो चलाकर थाने ले जाए। नरेंद्र ने हाथ जोड़कर विनती की कि उसे ड्राइविंग नहीं आती, लेकिन दरोगा का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। आरोप है कि उसे अपराधी की तरह घसीटते हुए चौकी लाया गया। वहां जो हुआ वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार कर देने वाला था। बेगुनाह गिड़गिड़ाता रहा, रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन वर्दीधारियों का दिल नहीं पसीजा।
रुपये छीने और शांतिभंग में चालान कर पल्ला झाड़ने की कोशिश
जुल्म की दास्तां यहीं खत्म नहीं हुई। आरोप है कि चौकी प्रभारी ने नरेंद्र की जेब में रखे अठारह सौ रुपये और उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया। अपनी बर्बरता को छिपाने के लिए पुलिस ने उलटा नरेंद्र पर ही शांतिभंग की धाराओं में कार्रवाई कर दी ताकि मामला दब जाए। जब पीड़ित के परिजनों ने भाजपा नेता प्रेम सिंह कुशवाह के साथ मिलकर हस्तक्षेप किया, तब जाकर सच्चाई की परतें खुलनी शुरू हुईं। जमानत के बाद जब पीड़ित न्याय की गुहार लेकर आलाधिकारियों के पास पहुंचा, तो उसकी शारीरिक स्थिति देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। पुलिस की इस कार्यप्रणाली ने गरीब जनता के मन में कानून के प्रति विश्वास को हिला कर रख दिया है।
निलंबन की कार्रवाई और बढ़ती नाराजगी
मामले की गंभीरता और बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार को निलंबित कर दिया है। उनकी जगह गौरव राठी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल निलंबन ऐसी दरिंदगी की पर्याप्त सजा है? एसीपी छत्ता को उन अन्य पुलिसकर्मियों की पहचान करने का जिम्मा सौंपा गया है जो इस टॉर्चर के दौरान वहां मौजूद थे। आगरा में लगातार सामने आ रहे पुलिस उत्पीड़न के मामले यह संकेत दे रहे हैं कि विभाग के भीतर अनुशासन की भारी कमी है और कुछ पुलिसकर्मी खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। पीड़ित नरेंद्र अब भी ट्रॉमा में है और इंसाफ का इंतजार कर रहा है।
---समाप्त---