(उत्तराखण्ड तहलका): डोनल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान, उन्होंने यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारत सहित वैश्विक तेल बाज़ार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। भारत पर संभावित प्रभाव ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव: प्रतिबंधों के कारण रूस से तेल का आयात कम होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रियायती दरों पर रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार बन गया था। आयात की कीमतों में वृद्धि: प्रतिबंधों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की संभावना है। इससे भारत के आयात बिल में वृद्धि हो सकती है, जो पहले से ही कच्चे तेल का 85% से अधिक आयात करता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज को झटका: इस घटनाक्रम का असर मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी पड़ सकता है, जिसने दिसंबर 2024 में रोसनेफ्ट के साथ दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। प्रतिबंधों के कारण उसे रूसी तेल का आयात रोकना पड़ सकता है। राजनयिक तनाव: रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करना भारत के लिए एक नाजुक राजनयिक चुनौती है, क्योंकि भारत को अमेरिका के साथ अपने संबंधों और रूस के साथ अपने पुराने संबंधों के बीच संतुलन बनाना होगा। यह भी पढ़ें: ट्रंप ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध ट्रंप का बयान और भारत की प्रतिक्रिया ट्रंप ने यह दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल खरीद कम करने का वादा किया है, लेकिन भारत सरकार ने इस दावे को खारिज कर दिया था। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा था कि भारत अपने उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए वहीं से तेल खरीदेगा जहाँ से उसे खरीदना होगा। स्थिति की तात्कालिकता
- यह जानकारी 23 अक्टूबर, 2025 तक के घटनाक्रमों पर आधारित है, जब ट्रंप प्रशासन ने रोसनेफ्ट और लुकोइल पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की।
- अंतरराष्ट्रीय बाज़ार और भू-राजनीतिक हालात लगातार बदल रहे हैं, जिससे इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करना अभी मुश्किल है।