वाराणसी कफ सिरप सिंडिकेट मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जिसे अब तक केवल दवाइयों की अवैध तस्करी माना जा रहा था, वह दरअसल एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का हिस्सा निकला है। पुलिस की हालिया कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कफ सिरप तो महज एक जरिया था, जबकि असली खेल करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद करने और उसे देश से बाहर भेजने का था।

​कफ सिरप सिंडिकेट का हवाला कनेक्शन

​वाराणसी पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ के दौरान शुभम जायसवाल नाम के मुख्य सरगना का नाम प्रमुखता से उभरा है। जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के सीधे तार शुभम से जुड़े थे। यह पूरा गिरोह न केवल नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा था, बल्कि इस अवैध व्यापार से अर्जित धन को हवाला के जरिए ठिकाने लगा रहा था। इस सिंडिकेट में नकदी के साथ-साथ सोने का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा था, जो इस संगठित अपराध की गहराई को दर्शाता है।

​शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों का खेल

​इस पूरे गोरखधंधे की सबसे अहम कड़ी शेल कंपनियां हैं। आरोपियों ने अपनी काली कमाई को छिपाने के लिए 50 से अधिक फर्जी या शेल कंपनियां बना रखी थीं। शुरुआती जांच में इन कंपनियों के बैंक खातों के माध्यम से लगभग 40 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन की बात सामने आई है। यह पैसा अलग-अलग खातों में घुमाया जाता था ताकि जांच एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके। आरोपियों ने इतनी सफाई से जाल बुना था कि पहली नजर में यह सब वैध व्यापार जैसा प्रतीत होता था, लेकिन बारीकी से जांच करने पर इन कंपनियों का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला।

​कोड वर्ड और 10 रुपये के नोट का रहस्य

​हवाला कारोबार को अंजाम देने के लिए यह गिरोह बेहद शातिर और फिल्मी तरीका अपनाता था। पैसों के लेनदेन की पुष्टि के लिए 10 रुपये के नोट का इस्तेमाल टोकन के रूप में किया जाता था। नोट का नंबर ही वह कोड होता था जो पैसा देने और लेने वाले के बीच विश्वास का आधार बनता था। इसके अलावा बातचीत के लिए 'नीला' और 'पीला' जैसे कोड वर्ड्स का उपयोग होता था ताकि पुलिस या खुफिया एजेंसियां उनकी बातों को डिकोड न कर सकें। इस डिकोडिंग के जरिए ही करोड़ों की नकदी एक हाथ से दूसरे हाथ तक पहुंचाई जा रही थी।


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​मास्टरमाइंड की दुबई में मौजूदगी

​इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर है। खुफिया इनपुट और तकनीकी जांच के आधार पर उसकी लोकेशन दुबई में बताई जा रही है। माना जा रहा है कि वह वहीं बैठकर भारत में अपने इस साम्राज्य को संचालित कर रहा था। वाराणसी पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग लेकर शुभम तक पहुंचने की तैयारी कर रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क की जड़ों को पूरी तरह से काटा जा सके।

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