पहाड़ों में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। ऊंची चोटियों पर ठंड ने दस्तक दे दी है, तो निचले इलाकों में बादलों ने डेरा जमा लिया है। सिखों के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते पारा तेजी से लुढ़क गया है और वहां कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। हेमकुंड साहिब पहुंचे श्रद्धालु ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। दूसरी तरफ, प्रदेश में मानसून की विदाई से ठीक पहले बादलों का ऐसा जमघट लगा है कि मौसम विभाग को कई जिलों के लिए खतरे की घंटी बजानी पड़ गई है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि अगले तीन दिन राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम बेहद तल्ख रहने वाला है।
कुमाऊं से गढ़वाल तक भारी चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिण ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तरफ बने गहरे दबाव के उत्तर की ओर बढ़ने से उत्तराखंड में बारिश का नया दौर शुरू हुआ है। शुक्रवार यानी 26 सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में बादलों के जमकर बरसने का अंदेशा जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही देहरादून, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भी भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। शनिवार 27 सितंबर को भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। उस दिन देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी में मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट है, जबकि बाकी पहाड़ी जिलों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बौछारें पड़ सकती हैं। रविवार को भी उत्तरकाशी, हरिद्वार और दून में कई जगह तेज गरज-चमक के साथ पानी गिर सकता है।
पहाड़ों पर सफर में बरतें सावधानी
लगातार तेज बारिश के चलते संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में चट्टानें खिसकने और रास्ते बंद होने का बड़ा डर पैदा हो गया है। जगह-जगह भूस्खलन से सड़कें और हाईवे बाधित हो सकते हैं, जिससे बिजली और पानी के संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। बरसाती नदी-नाले उफान पर आने से निचले मोहल्लों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है। इसका सीधा असर चारधाम यात्रा, पहाड़ों पर ट्रैकिंग और हेलीकॉप्टर सेवाओं पर पड़ सकता है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों और सैलानियों को आगाह किया है कि जब तक बहुत जरूरी काम न हो, तब तक सफर करने से बचें। उफनते गदेरों या नदियों के पास बिल्कुल न जाएं और भूस्खलन वाले रास्तों पर गाड़ी चलाते समय पूरी सावधानी रखें।
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