लखनऊ, 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की प्रारंभिक जांच में कुछ मतदाताओं के एपिक (मतदाता पहचान पत्र) नंबर ऑनलाइन खोजने पर दूसरे मतदाताओं का विवरण दिखाई देने की पुष्टि हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने पूरे पीलीभीत जिले की मतदाता सूची की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रदेश के सभी 75 जिलों के निर्वाचन अधिकारियों से 48 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की गई है।
ईआरओ और वीआरसी ऑपरेटर पर कार्रवाई
पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची में मिली अनियमितताओं के बाद संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (वीआरसी) ऑपरेटर को निर्वाचन कार्य से हटाने की कार्रवाई की गई है। संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगा गया है। मामले में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी की भी जांच की जाएगी।
सभी जिलों की मतदाता सूची की जांच
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूचियों की गहन जांच करने को कहा है। विशेष रूप से मतदाताओं के नाम, एपिक नंबर और ऑनलाइन उपलब्ध विवरण में किसी प्रकार की विसंगति की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, पीलीभीत में मिली गड़बड़ी के आधार पर पूरे प्रदेश की मतदाता सूचियों में अनियमितता होने की पुष्टि नहीं हुई है।
4 जनवरी तक अधिकारियों के तबादलों पर रोक
मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) को देखते हुए निर्वाचन कार्य से जुड़े डीएम, एडीएम, एसडीएम और अन्य अधिकारियों के तबादलों पर भी रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है। यह प्रतिबंध 12 नवंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक लागू रहेगा। इस अवधि में निर्वाचन आयोग की पूर्व अनुमति के बिना संबंधित अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 12 नवंबर को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इसके बाद 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी।
---समाप्त---