पीलीभीत जिले की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी की विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दो उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) और मतदाता पंजीकरण केंद्र पर तैनात कंप्यूटर सहायक के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच में सामने आया कि बिना किसी भौतिक आवेदन, फॉर्म या सहायक दस्तावेजों के ही हजारों मतदाताओं के विवरण में ऑनलाइन फेरबदल कर दिया गया।

​जांच में खुली फर्जीवाड़े की परतें

​जिलाधिकारी की ओर से कराई गई प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर सहायक ने 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच मतदाताओं के विवरण सही करने के नाम पर कुल 13,779 प्रविष्टियां दर्ज की थीं। जब इन प्रविष्टियों की जमीनी और दस्तावेजी स्तर पर पड़ताल की गई, तो रिकॉर्ड रूम या कार्यालय में इनसे संबंधित एक भी मूल फॉर्म या कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं मिला।

​बिना फॉर्म स्वीकृत हुईं प्रविष्टियां


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​बिना किसी वैध दस्तावेज के दर्ज की गई इन 13,779 प्रविष्टियों में से 10,470 फॉर्म बाकायदा सिस्टम में स्वीकृत भी कर दिए गए, जबकि 3,309 फॉर्म रिजेक्ट पाए गए। इस पूरी प्रक्रिया में बिना किसी आधिकारिक सत्यापन या कागजात के 10,470 मतदाताओं का रिकॉर्ड सीधे तौर पर सिस्टम में अप्रूव कर दिया गया, जिससे मतदाता सूची के डेटा में भारी विसंगतियां दर्ज हो गईं।

​लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर शिकंजा

​निर्वाचन नियमावली के विपरीत बिना भौतिक सत्यापन के इतनी बड़ी संख्या में बदलावों को मंजूरी देने के मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। प्रशासनिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि बिना दस्तावेजों के 10,470 मतदाताओं की एंट्री स्वीकृत होना गंभीर लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। इसी आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ-साथ तत्कालीन दोनों एसडीएम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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