रामपुर (उत्तराखण्ड तहलका): दीपों और खुशियों के पर्व दीपावली के पावन अवसर पर उत्तराखंड बार्डर स्थित भानु प्रताप पब्लिक स्कूल के प्रांगण में जगमग रोशनी, संगीत, नृत्य और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। विद्यालय ने दीपोत्सव कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया, जिसमें विद्यार्थियों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आज के कार्यक्रम की थीम थी “दीप जलाएँ, पर प्रदूषण नहीं”।
कार्यक्रम की शुरुआत मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की आराधना से हुई। विद्यार्थियों ने “मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे” भजन प्रस्तुत करते हुए वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात प्रधानाचार्य  महेश चंद्रा ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आयोजित कार्यक्रम में कक्षा नर्सरी के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने “राम राज्य” पर आधारित मनमोहक झांकी प्रस्तुत की, जिसमें दक्ष पांडे, भव्य, हिताक्षी, अशनूर, सानवी, ध्रुव, शिवांश, हमराज, वेदांश, इशिका आदि बच्चों ने अपनी भावपूर्ण अभिनय प्रतिभा से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों ने “योगः कर्मसु कौशलम्” थीम पर एक प्रेरणादायक नाटिका प्रस्तुत की। इस नाटिका के माध्यम से बच्चों ने संदेश दिया — “दीप जलाएँ, पर प्रदूषण नहीं।” इस प्रस्तुति में योग के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा के संतुलन की सुंदर झलक दिखाई दी, जिसने उपस्थित जनों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरित किया। कक्षा तीन की ही सोनाली, तमन्ना, जानवी, नवनीत, नैंसी, सिद्धांत, आयांश और ऋषभ ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुति देकर अपनी सादगी और पारंपरिक वेशभूषा से सभी दर्शकों का मन मोह लिया।
कक्षा छह के  हरिबाला कृष्णा, फतेह सिंह सिधु, अमन कुमार,  दक्ष चौहान, आदित्य, पीयूष गेरा, अंजलि, अर्शिता, अवनी, खुशी आदि बच्चों ने भी “पटाकों का इस्तेमाल न करें” थीम पर अपनी प्रस्तुती देकर प्रदूषण न फैलाने का संदेश दिया। बच्चों के मुस्कराते चेहरों ने एक ही संदेश दिया “दीप जलाओ, अंधेरा मिटाओ, खुशियों से धरती को महकाओ”। वहीं कक्षा सात व आठ की छात्राओं वैष्णवी, इशिका, पलक चन्द्रा, छवि, मान्या, आराध्या, मानवी, कोमल, हर्षदीप, दिव्यांशी, आरती, शानवी और लक्षिका ने गुजरात के पारंपरिक गरबा और फोक डांस की रंगीन प्रस्तुति से मंच को झिलमिला दिया।
इसके अतिरिक्त विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों ने भी लोकगीतों, शास्त्रीय नृत्यों, कविताओं और भजनों के माध्यम से दीपावली पर्व की पावन भावना को साकार किया। संपूर्ण विद्यालय परिसर में बच्चों की ऊर्जा, संगीत और ताल की गूंज से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो दीपों की रौशनी के साथ संस्कृति भी झिलमिला उठी हो। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के उपरांत कक्षा 8 से 10 तक के विद्यार्थियों ने पारंपरिक और आधुनिक थीम पर रंगोली प्रतियोगिता में भाग लिया। रंगों और कल्पनाओं से सजी रंगोलियाँ विद्यालय के आँगन को दुल्हन-सा सजा रही थीं।
पारंपरिक ‘ओम’, ‘दीप’, ‘लक्ष्मी चरण’, ‘भारत माता’ और ‘स्वच्छता संदेश’ जैसे प्रतीकों से सजी इन रंगोलियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में विजयी छात्रों को सम्मानित करते हुए प्रधानाचार्य महेश चंद्रा ने बच्चों की रचनात्मकता और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अपने प्रेरणादायक शब्दों में कहा “दीप जलाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है। आइए, हम सब मिलकर स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण–अनुकूल दीपावली मनाएँ।”
मुख्य अतिथियों और शिक्षकों ने भी बच्चों की प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और नैतिक मूल्यों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का समापन सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जहां विद्यालय परिसर में सैकड़ों दीपों की ज्योति से वातावरण आलोकित हो उठा। सभी शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक इस सुंदर दृश्य के साक्षी बने।

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