उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिसिया इकबाल को लेकर अक्सर चर्चाएं होती हैं, लेकिन गाजीपुर से आई एक हालिया तस्वीर ने खाकी की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिरनो के क्यामपुर टोल प्लाजा पर जब बलिया के सपा सांसद सनातन पांडेय अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे थे, तो वहां शांति व्यवस्था बनाए रखने पहुंचे नगरा थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने कुछ ऐसा किया जो पुलिस मैन्युअल और अनुशासन की मर्यादा के बिल्कुल उलट था। वीडियो में साफ दिख रहा है कि वर्दी पहने थानाध्यक्ष महोदय ने न केवल सांसद के करीब जाकर उनके पैर छुए, बल्कि झुककर 'भइया प्रणाम' भी कहा। यह दृश्य वहां मौजूद भीड़ के लिए भले ही चर्चा का विषय रहा हो, लेकिन एक अनुशासित बल के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है।

वायरल वीडियो

मर्यादा का ह्रास और वायरल वीडियो का सच

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर जंगीपुर विधायक वीरेंद्र यादव भी मौजूद थे। वीडियो में विधायक और थानाध्यक्ष के बीच जो संवाद हुआ, वह शासन-प्रशासन के बीच के संतुलन की पोल खोलता नजर आया। जब विधायक ने एसएचओ से पूछा कि वह वहां कैसे आए और उन्हें गिरफ्तार करने की बात कही, तो थानाध्यक्ष ने बड़ी ही विनम्रता से उत्तर दिया कि उनकी इतनी 'औकात' नहीं है। वर्दीधारी अधिकारी के मुंह से निकले ये शब्द न केवल उनकी लाचारी को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कैसे राजनीतिक रसूख के सामने सिस्टम खुद को बौना महसूस करने लगा है। मौके पर मौजूद लोग इस बातचीत को सुनकर हंस पड़े, लेकिन यह हंसी उस वर्दी के सम्मान पर एक तमाचा थी जिसे देश के संविधान की रक्षा की शपथ दिलाई जाती है।


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सफाई की कोशिश और विभागीय कार्रवाई का शिकंजा

मामला बढ़ता देख और वीडियो के वायरल होने के बाद थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने अपनी सफाई पेश की है। उनका तर्क है कि सांसद दूसरी तरफ देख रहे थे, इसलिए उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए उन्होंने इशारा किया था और धरना समाप्त करने का आग्रह किया था। हालांकि, वीडियो के विजुअल्स कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। इस विवादित प्रकरण पर बलिया के एएसपी उत्तरी दिनेश शुक्ल ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्दी की गरिमा के खिलाफ इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बैठा दी गई है और विभागीय कार्रवाई की तैयारी चल रही है। अब देखना यह है कि क्या रसूख के आगे झुकी खाकी को जांच के बाद अपना खोया हुआ सम्मान वापस मिल पाता है या नहीं।

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