दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर उन्नाव मामले की गूँज का केंद्र बना, जहाँ दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने के फैसले के विरोध में पीड़िता और उनकी माँ प्रदर्शन कर रही थीं। जहाँ एक ओर माहौल न्याय की माँग और सेंगर के खिलाफ नारों से गरम था, वहीं अचानक एक महिला द्वारा दोषी के पक्ष में मोर्चा खोलने से स्थिति असहज और तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उस समय दंग रह गई जब एक महिला ने हाथ में तख्ती लेकर सजायाफ्ता अपराधी कुलदीप सिंह सेंगर का खुला समर्थन करना शुरू कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन तब बड़े संघर्ष में बदल गया जब पीड़िता के समर्थकों और इस महिला के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस को बीच-बचाव कर स्थिति को संभालना पड़ा, लेकिन इस घटना ने दिल्ली के गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

कौन हैं बरखा त्रेहान और क्या है ‘पुरुष आयोग’

सेंगर के समर्थन में उतरी महिला की पहचान बरखा त्रेहान के रूप में हुई है, जो खुद को 'पुरुष आयोग' की अध्यक्ष बताती हैं। यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत में संवैधानिक या आधिकारिक तौर पर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' मौजूद नहीं है, जबकि राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) एक वैधानिक निकाय है। बरखा त्रेहान द्वारा संचालित यह 'पुरुष आयोग' दरअसल एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) की तरह काम करता है। यह संगठन मुख्य रूप से पुरुषों के अधिकारों, वैवाहिक विवादों में पुरुषों के साथ होने वाले कथित अन्याय और लिंग-आधारित कानूनों के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाने का दावा करता है। बरखा त्रेहान लंबे समय से सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से पुरुषों के लिए अलग कानूनी सुरक्षा और आधिकारिक आयोग की माँग करती रही हैं। हालाँकि, एक प्रमाणित बलात्कारी के पक्ष में खड़े होने के उनके इस हालिया कदम ने इस संगठन की साख और नैतिकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का आक्रोश और विवाद


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बरखा त्रेहान का यह रुख सोशल मीडिया पर तीव्र आलोचना और चर्चा का विषय बना हुआ है। इंटरनेट पर लोग यह तर्क दे रहे हैं कि कुलदीप सेंगर महज एक साधारण आरोपी नहीं बल्कि एक प्रमाणित अपराधी है, जिसे निचली अदालत ने गहन जाँच और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद विचलित करने वाला है कि एक सजायाफ्ता मुजरिम के पक्ष में कोई महिला ढाल बनकर खड़ी हो रही है। भयाना ने बरखा त्रेहान के व्यवहार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि उनकी मानसिक स्थिति स्थिर नहीं है और उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपराधी का महिमामंडन करना समाज के लिए एक घातक मिसाल पेश करता है।

पीड़िता के मनोबल पर चोट और सुरक्षा की चिंता

सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर चिंता जताई है कि इस तरह के कृत्य पीड़िता के साहस को कमजोर करने का एक सुनियोजित प्रयास हैं। योगिता भयाना ने जोर देकर कहा कि हम बिना सबूतों के कोई बात नहीं कर रहे हैं, सेंगर को अदालत ने गुनहगार पाया है और सजा सुनाई है। हम केवल उसे मिली जमानत और सजा के निलंबन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक पीड़िता अपनी सुरक्षा और गरिमा के लिए लड़ रही हो, तब समाज के एक हिस्से का अपराधी के समर्थन में खड़ा होना कितना डरावना हो सकता है। पीड़िता की माँ ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सब उनके परिवार के मनोबल को गिराने के लिए किया जा रहा है, ताकि वे अपनी कानूनी लड़ाई छोड़ दें।

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