रामपुर जनपद में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी सफलता अर्जित की है। अपराध शाखा और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने मिलकर जीएसटी चोरी के एक बड़े और संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में काफी समय से वांछित चल रहे दो अभियुक्तों को पुलिस ने दबोच लिया है, जिन्होंने फर्जी प्रपत्रों और जाली दस्तावेजों के सहारे सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाई थी। यह गिरफ्तारी न केवल एक बड़ी कामयाबी है बल्कि उन तत्वों के लिए भी कड़ी चेतावनी है जो फर्जी फर्मों के माध्यम से आर्थिक तंत्र को खोखला कर रहे हैं।

अजीमनगर थाने में दर्ज मामले से खुला धोखाधड़ी का कच्चा चिट्ठा

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें पिछले वर्ष अगस्त माह में दर्ज हुई एक शिकायत से जुड़ी हैं। राज्य कर विभाग मुरादाबाद के प्रधान सहायक आदित्य प्रताप सिंह ने अजीमनगर थाने में जीएसटी दस्तावेजों के साथ की गई हेराफेरी की तहरीर दी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया था कि कुछ लोगों ने मिलकर कागजों में जालसाजी की और जीएसटी चोरी के माध्यम से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। विभाग की इस शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया था। शुरुआती जांच में कुछ स्थानीय नाम सामने आए थे, लेकिन जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा, इस गिरोह के तार उत्तराखंड तक जुड़ते चले गए।

उत्तराखंड से जुड़े जालसाजी के तार और अभियुक्तों की गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना का जिम्मा अपराध शाखा को सौंपा गया था। निरीक्षक अनुपम शर्मा के नेतृत्व में टीम ने साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन किया, जिससे अमन कुमार और नवाब अली के नाम उजागर हुए। ये दोनों आरोपी उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के जसपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस टीम ने सटीक सूचना और तकनीकी सर्विलांस की मदद से शनिवार को इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। पकड़े गए अभियुक्तों के पास से पुलिस ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई फर्जी मोहरें बरामद की हैं, जिनका उपयोग वे अवैध कार्यों को अंजाम देने के लिए करते थे।

आगामी विधिक कार्रवाई और विभाग की सख्त निगरानी

गिरफ्तारी के बाद पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस सिंडिकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। बरामद किए गए रजिस्टरों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से कई अन्य संदिग्ध फर्मों के नाम सामने आने की उम्मीद है। पुलिस टीम अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इन लोगों ने अब तक कुल कितनी राशि की टैक्स चोरी की है और इस खेल में उनके साथ विभाग के भीतर या बाहर और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जीएसटी चोरी जैसे संगीन आर्थिक अपराधों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि सरकारी राजस्व को सुरक्षित रखा जा सके।


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