- यूपी रामपुर में Indian Citizenship मिलने पर खुशी की लहर
- 12 भाग्यशाली लोगों को मिली भारत की नागरिकता
- 1964 में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर रामपुर आए थे
- विस्थापन के दर्द पर लगी कानूनी मुहर
रामपुर/बिलासपुर (Uttarakhand Tehelka): उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बिलासपुर क्षेत्र में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत 12 और बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों को Indian Citizenship मिलने से इलाके में ऐतिहासिक खुशी का माहौल है। शुक्रवार की शाम पांच बजे जैसे ही उनके मोबाइल पर नागरिकता का मैसेज आया, ये शरणार्थी खुशी से उछल पड़े।

निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति के विधिक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपांकर बैरागी, प्रकाश राय तथा रविन्द्र सिकदार ने बताया कि क्षेत्र के बंगाली बाहुल्य गाँव अशोकनगर उर्फ मानपुर ओझा उर्फ बंगाली कॉलोनी, गोकुलनगरी और दिबदिबा आदि में शरणार्थियों की आबादी लगभग साढ़े 14 हजार है।
इन 12 लोगों को मिली 'पूर्ण' भारतीय नागरिकता
जिन 12 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिली है, वे वर्षों से संघर्ष कर रहे परिवारों से हैं। यह उनकी चौथी और पांचवीं पीढ़ी है जो अब जाकर पूर्ण Indian Citizenship प्राप्त कर सकी है।
नागरिकता पाने वाले इन 12 भाग्यशाली लोगों में रविंद्र विश्वास, गौतम कुमार बढ़ई, प्रकाश बढ़ई, मदन मोहन बढ़ई, महानंद बढ़ई, रविंद्र सरकार, गोपाल तरफदार, शांति भंडार, अमूल्य मलिक, लक्ष्मी राय, वीरेंद्र, और निकिता दास शामिल हैं।
इन नए नागरिकों ने सरकार का शुक्रिया अदा किया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी प्रकट की। उन्होंने कहा कि यह पल उनके लिए ऐतिहासिक है, जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। इससे पहले मात्र एक व्यक्ति, तपन विश्वास, को ही नागरिकता मिल पाई थी।
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CAA: एक लंबी कानूनी लड़ाई का अंत
समिति के विधिक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने बताया कि 1955 के कानून के तहत माता-पिता दोनों भारतीय होने पर ही नागरिकता मिलती थी। 2003 में संशोधन हुआ कि माता-पिता में से एक व्यक्ति भारत का नागरिक हो। लेकिन 1964 के बाद बांग्लादेश से आकर बसे इन हजारों परिवारों को आज तक Indian Citizenship नहीं मिल पाई थी। उन्होंने बताया कि कुछ पुराने विस्थापितों को सरकार ने पुनर्वास के तहत प्रति परिवार पाँच एकड़ भूमि पंजीकृत पट्टे के रूप में दी थी।
दस्तावेजों की कमी बनी बड़ी बाधा
दीपांकर बैरागी ने नागरिकता मिलने की खुशी के साथ ही एक बड़ी समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि लगभग 650 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया है, लेकिन उनके आवेदन पत्र पेंडिंग पड़े हैं। इसका मुख्य कारण दस्तावेजों की कमी है, जिससे Indian Citizenship मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने सरकार और अधिकारियों से इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
बंगाली परिवार क्षेत्र के गाँव मानपुर ओझा-बंगाली कॉलोनी, गोकुलनगरी, कौशलगंज, धनोरा फार्म, नगरिया खुर्द, लालपुर, दिबदिबा, रामनगर, शिवनगर, गदा फार्म, गोविंदपुरा, चकफेरी के अलावा नगर के कई मुहल्लों में निवास करते हैं।
सरकार से दो प्रमुख मांगें
नागरिकता संशोधन अधिनियम के पारित होने के बाद बंगाली समाज ने केंद्र सरकार के समक्ष दो अन्य प्रमुख मांगें भी रखी हैं:
- भूमियों का मालिकाना हक: शरणार्थियों को दी गई भूमियों का पूर्ण मालिकाना हक दिया जाए।
- अनुसूचित जाति (SC) की मान्यता: बंटवारे के बाद हिन्दू बंगाली समाज की उपजातियों—नामोशूद्र, पोण्ड्रा, मांझी, राजवंशी—को पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में अनुसूचित जाति (SC) की मान्यता मिल गई है, लेकिन उन्हें उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में यह मान्यता नहीं मिली है। इन जातियों को प्रदेश में जल्द SC का दर्जा दिया जाए।