उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट, मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक सुर्खियों में है। इस बार विवाद का केंद्र डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम सरकारी गेस्ट हाउस और यूनिवर्सिटी के बीच का वह रास्ता है जिसे प्रशासन ने दीवार खड़ी कर पूरी तरह बंद कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई है जब प्रशासन को सूचना मिली कि यूनिवर्सिटी की ओर से एक अनधिकृत रास्ता गेस्ट हाउस परिसर में खुलता है।
अतीत का रसूख और वर्तमान की शक्ति
रामपुर का यह सरकारी गेस्ट हाउस समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान विशिष्ट अतिथियों के ठहरने के लिए निर्मित कराया गया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा हमेशा से रही है कि आजम खान के राजनीतिक रसूख के चलते इस सरकारी संपत्ति का उपयोग लंबे समय तक यूनिवर्सिटी के एक विस्तारित हिस्से के रूप में ही किया जाता रहा। साल 2017 में राज्य की सत्ता में परिवर्तन होने के बाद रामपुर प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए इस गेस्ट हाउस को यूनिवर्सिटी के प्रभाव से मुक्त कराया था। तब से यह गेस्ट हाउस जिला प्रशासन के नियंत्रण में है और सरकारी मेहमानों के लिए आरक्षित है।
रास्ता बंद करने की वजह और प्रशासनिक रुख
हालिया घटनाक्रम में रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के निर्देशन में प्रशासनिक टीम ने गेस्ट हाउस और यूनिवर्सिटी की सीमा पर एक पक्की दीवार खड़ी कर दी है। प्रशासन का मानना है कि यूनिवर्सिटी की ओर से आने वाले किसी भी गुप्त या अनधिकृत रास्ते से गेस्ट हाउस की सुरक्षा और उसकी सरकारी स्वायत्तता प्रभावित हो रही थी। इस दीवार के निर्माण के पीछे मुख्य उद्देश्य गेस्ट हाउस का यूनिवर्सिटी से किसी भी तरह का भौतिक संबंध समाप्त करना है, ताकि भविष्य में इस सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या अनाधिकृत प्रवेश की गुंजाइश न रहे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
रामपुर में आजम खान की संपत्तियों और उनके प्रोजेक्ट्स को लेकर प्रशासन की यह सख्ती कोई नई बात नहीं है, लेकिन गेस्ट हाउस के रास्ते को पूरी तरह सील करना एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और उनका उचित रखरखाव प्रशासन की प्राथमिकता है। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर जौहर यूनिवर्सिटी के प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति देखी जा रही है, जबकि आम जनता के बीच सरकारी गेस्ट हाउस की अस्मिता को लेकर बहस छिड़ गई है।
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