भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. सुकदेव नंदी को पिछले वर्ष साइबर अपराधियों ने अपना निशाना बनाया था। अपराधियों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के खौफनाक जाल में फंसाकर तीन दिनों तक बंधक बनाए रखा और डरा-धमकाकर करीब 1.29 करोड़ रुपये हड़प लिए। जब इस सनसनीखेज मामले की जांच शुरू हुई तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नौ आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया। लेकिन जांच की आंच जब लखनऊ की एक कंपनी के मालिक और उसके साझेदार अनूप मिश्रा तक पहुंची, तो पुलिस महकमे के भीतर ही छिपे एक 'विभीषण' का चेहरा सामने आ गया। पता चला कि सीओ तृतीय कार्यालय में तैनात सिपाही संदीप कुमार इस पूरे मामले में पुलिस की गतिविधियों की जानकारी अपराधियों तक पहुंचा रहा था।
रिश्तेदारी के मोह में दांव पर लगाई विभाग की साख
साइबर थाना पुलिस जब मुख्य आरोपियों की तलाश में जुटी थी, तब उन्हें पता चला कि संदिग्ध अनूप मिश्रा दरअसल सिपाही संदीप कुमार का चचेरा भाई है। अनूप की कंपनी के खाते में ही ठगी की रकम का पहला ट्रांजेक्शन हुआ था। पुलिस ने जब अनूप की लोकेशन ट्रैक की और संदीप से उसके बारे में जानकारी मांगी, तो सिपाही ने कर्तव्य से ऊपर रिश्तों को रखा। जैसे ही पुलिस की टीम अनूप को गिरफ्तार करने के लिए उसके पैतृक गांव हरदोई के लिए रवाना हुई, संदीप ने फोन कर उसे सतर्क कर दिया। परिणाम यह हुआ कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही शातिर ठग फरार होने में कामयाब रहा। इस गद्दारी ने न केवल जांच की गति धीमी की बल्कि अपराधियों के हौसले भी बुलंद कर दिए।
एसएसपी की सख्त कार्रवाई और खाकी को कड़ा संदेश
पुलिस टीम को जब संदीप की गतिविधियों पर संदेह हुआ, तो मामले की शिकायत एसएसपी अनुराग आर्य से की गई। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ क्राइम गौरव सिंह को विस्तृत जांच सौंपी। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सामने आया कि संदीप कुमार विभागीय सूचनाएं लीक कर रहा था ताकि उसका भाई कानून की गिरफ्त से बचा रहे। अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए एसएसपी ने सिपाही संदीप पर 28 दिन के वेतन के बराबर अर्थदंड लगाया है और उसके एक वर्ष के प्रमोशन पर भी रोक लगा दी है।
---समाप्त---"विज्ञानी से ठगी के मामले में साइबर थाना पुलिस ने नौ आरोपितों को जेल भेज दिया है। बाकी आरोपितों की तलाश जारी है। एक आरोपित की गिरफ्तारी से पहले सिपाही ने सूचना लीक की थी उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया है। - अनुराग आर्य, एसएसपी।