जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। शासन द्वारा जारी स्थानांतरण और समायोजन की नीति को जिस तरह से स्थानीय स्तर पर लागू किया गया है, उसने शिक्षकों के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का आरोप है कि विभाग ने तय नियमों और कायदों को दरकिनार करते हुए शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की नीयत से कार्य किया है। बिना किसी मानवीय दृष्टिकोण के किए गए इन बदलावों ने विभाग की पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
दूरी का दंश और महिला शिक्षकों की अनदेखी
समायोजन प्रक्रिया में सबसे अधिक चौंकाने वाला पहलू वह दूरी है, जिसे तय करने के लिए शिक्षकों को मजबूर किया गया है। महिला और पुरुष शिक्षकों को उनके वर्तमान ब्लॉक से हटाकर 60 से 70 किलोमीटर दूर दूसरे ब्लॉकों में भेज दिया गया है। शिक्षक संघ का स्पष्ट तर्क है कि नीति के अनुसार स्थानांतरित और समायोजित शिक्षकों को उनके तैनाती वाले ब्लॉक में ही रिक्त पदों पर समायोजित किया जाना चाहिए था, लेकिन यहाँ नियमों को मरोड़कर व्यक्तिगत लाभ या उत्पीड़न के उद्देश्य से लागू किया गया। विशेषकर महिला शिक्षकों से विकल्प न लेना विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
कार्यालय में 'अनाधिकृत' तंत्र का बोलबाला
ज्ञापन में एक बेहद गंभीर मुद्दा बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सक्रिय बाहरी तत्वों का उठाया गया है। आरोप है कि कार्यालय में कुछ अनाधिकृत व्यक्ति अनैतिक रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिनके 'कुकृत्यों' के कारण पूरे जिले में विभाग की छवि धूमिल हो रही है। इन्हीं तत्वों के इशारे पर सूचियों में हेरफेर और चहेतों को लाभ पहुँचाने की आशंका जताई गई है। शिक्षकों ने साफ कहा है कि जब तक इन बाहरी हस्तक्षेपों पर लगाम नहीं लगती, तब तक न्यायपूर्ण समायोजन की कल्पना करना बेमानी है।
मंत्री से न्याय की आस और आंदोलन की चेतावनी
जिला मंत्री चरण सिंह के नेतृत्व में सिंचाई मंत्री बलदेव सिंह औलख को सौंपे गए इस ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। उनकी स्पष्ट मांग है कि वर्तमान त्रुटिपूर्ण सूची को तत्काल निरस्त किया जाए और एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया और भौतिक स्थिति का सही आकलन नहीं हुआ, तो शिक्षक समाज चुप नहीं बैठेगा।
ज्ञापन देने वालों में मौजूद रहे
सिंचाई मंत्री को ज्ञापन सौंपने के दौरान जिले भर के शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया। इस दौरान प्रमुख रूप से ब्लॉक बिलासपुर ब्लॉक अध्यक्ष प्रताप सिंह, चमरौआ ब्लाक अध्यक्ष नरेंद्र सैनी, जिला उपाध्यक्ष सुभाष राठौर, तहसील प्रभारी सौरभ शर्मा, डा. अहसान खां, मेजर सिंह यादव, रामकिशोर, प्रसन्न प्रकाश और शिवकुमार मौजूद रहे। इनके साथ ही गौरव गंगवार, रावेश गंगवार, रामचंद्र, राजीव कश्यप, मंगल सैन, धर्मपाल, गोविंद सिंह, ओमवीर सिंह, सोमपाल सिंह, तारीक परवेज और हवलदार राम ने भी विभाग की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। महिला शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से रखने के लिए हेमलता सिंह, मंजू वाला, अनीता रानी, सुमन यादव और अनु सिंह के साथ मनोज कुमार, रहमत अली और ब्लाक अध्यक्ष डा. सरफराज अहमद आदि समेत दर्जनों शिक्षक उपस्थित रहे।