खाड़ी क्षेत्र में चल रहे ईरान और अमेरिका के संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। हाल ही में इराक के समुद्री क्षेत्र के पास अमेरिकी स्वामित्व वाले तेल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर हुआ हमला इस बात का प्रमाण है कि समुद्र में अब परंपरागत हथियारों के बजाय आत्मघाती तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। विस्फोटकों से लदी एक नाव को सीधे जहाज से टकराकर बड़ा धमाका किया गया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की जान जाने की खबर ने वैश्विक शिपिंग उद्योग को हिलाकर रख दिया है। यह हमला दर्शाता है कि अब व्यापारिक जहाज किसी भी सुरक्षा घेरे में पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। समुद्री लुटेरों के बजाय अब सैन्य समर्थित सुसाइड बोट्स का खतरा जहाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

भारतीय नागरिकों पर बढ़ता प्रहार

​इस युद्ध की आग में भारतीय नागरिक लगातार निशाना बन रहे हैं। मार्च की शुरुआत में ओमान के तट के पास हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पहले ही खतरे की घंटी बजा दी थी। एमवी एमकेडी व्योम और एमवी स्काईलाइट जैसे जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीयों की मौत और कई अन्य के घायल होने की घटनाओं ने इस संकट को भारत के लिए व्यक्तिगत बना दिया है। सऊदी अरब के अल खर्ज इलाके में हुए प्रोजेक्टाइल हमले ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि वहां राहत की बात यह रही कि किसी भारतीय की जान नहीं गई, लेकिन निरंतर होते ये हमले खाड़ी में काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों के मनोबल और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसी सांसें

​सामरिक दृष्टि से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय भारतीय जहाजों के लिए एक अभेद्य जाल बन गया है। आंकड़ों के अनुसार भारत के लगभग 24 जहाज इस समय होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर सवार करीब 677 भारतीय नाविकों की सुरक्षा इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। इसके अलावा पूर्वी हिस्से में भी भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं। होर्मुज का यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन वर्तमान में यह युद्ध का मुख्य केंद्र बन चुका है। जहाजों का इस तरह फंसना न केवल मानवीय संकट है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए भी एक बड़ी बाधा साबित हो रहा है।

राजनयिक चुनौती और सरकारी चौकसी

​बढ़ते हमलों के बीच भारत सरकार के सामने एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध हैं और दूसरी तरफ ईरान के साथ ऐतिहासिक और ऊर्जा से जुड़े जुड़ाव। वर्तमान में 28 भारतीय जहाजों और सैकड़ों नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार हर पल की गतिविधि पर नजर रख रही है। समुद्री सुरक्षा के लिए तैनात भारतीय नौसेना और राजनयिक चैनल इस कोशिश में जुटे हैं कि तनाव को कम किया जा सके और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके। खाड़ी में अस्थिरता का मतलब है तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जिससे निपटने के लिए भारत को एक बेहद संतुलित और सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता है।


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