एक तरफ जहां प्रदेश की योगी सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है तो वहीं उनकी इस नीति को चुनौती देने का काम बेखौफ बदमाशों ने करके प्रदेश की कानून व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। लोगों का कहना है कि जब कानून के रखवालों के परिजन ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता कैसे भरोसा करे कि वह सुरक्षित है। यह सनसनीखेज मामला आंबेडकर नगर जिले के मालीपुर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां पुलिस महकमे के एक बड़े अफसर के घर में घुसकर अपराधियों ने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया।

पैतृक घर में घुसकर वारदात को दिया अंजाम

​आंबेडकर नगर के रूढ़ा धामरुआ गांव में स्थित आवास पर 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्रा की 95 वर्षीया मां इंद्रावती अकेली रहती थीं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आईपीएस अधिकारी खुद गांव आए थे और परिजनों से मिलकर 15 अगस्त की शाम को वापस अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। उनके जाने के कुछ ही घंटों बाद बेखौफ बदमाशों ने सूने घर का फायदा उठाया और भीतर दाखिल हो गए। बदमाशों ने बुजुर्ग महिला के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वह चीख-पुकार न मचा सकें, जिससे दम घुटने और बर्बरता के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

शरीर से जेवर उतारे और सामान समेटा


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​अगली सुबह जब घरेलू सहायिका काम करने पहुंची तो घर का दरवाजा खुला पड़ा था। अंदर जाकर देखने पर चारपाई पर बुजुर्ग महिला का शव पड़ा मिला। बदमाशों ने हत्या करने के बाद मृतका के शरीर पर पहने हुए सारे सोने-चांदी के गहने उतार लिए। मांग टीका, नथुनी, झुमके, चेन और पायल समेत सभी कीमती सामान गायब थे। पूरे घर का सामान बिखरा हुआ था, जिससे साफ जाहिर होता है कि वारदात को लूटपाट के इरादे से अंजाम दिया गया है। IPS अधिकारी की मां के साथ हुई इस बर्बरता की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

​वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की माताजी की हत्या की खबर मिलते ही पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में जिले की पुलिस अधीक्षक और अयोध्या रेंज के बड़े अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए। सूचना मिलते ही पीड़ित आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्रा भी अपने गांव पहुंचे। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, लेकिन इस घटना ने खाकी के इकबाल पर गहरा सवालिया निशान लगा दिया है।

कानून-व्यवस्था के दावों पर उठे गंभीर सवाल

​राजधानी में तैनात अफसर के परिवार के साथ घटी इस वारदात ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष से लेकर आम जनता तक सरकार की कार्यशैली और पुलिस की गश्त पर तीखे सवाल उठा रही है। जब खाकी का तमगा धारण करने वाले अधिकारियों के अपने ही घर में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या आलम होगा। फिलहाल पुलिस अधिकारी जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा कर रहे हैं, लेकिन इस घटना ने शासन और प्रशासन की साख को भारी ठेस पहुंचाई है।

मामले पर पुलिस का पक्ष:

पुलिस जांच के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यूपी में तैनात आईपीएस आशुतोष मिश्रा की मां इंद्रावती देवी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में नहीं, बल्कि प्राकृतिक कारणों (हार्ट अटैक) से हुई है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच और रिपोर्ट में हत्या या लूट-खोपरी जैसी किसी भी आपराधिक साजिश के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि परिवार ने चोरी का दावा किया था, लेकिन जांच के दौरान घर के सभी गहने और कीमती सामान पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं। पुलिस ने मामले की सभी पहलुओं से जांच करने के बाद इसे नेचुरल डेथ करार दिया है।

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