उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में अपनी सख्त छवि के लिए पहचाने जाने वाले 2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईएएस अधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को इस बार सेवा विस्तार नहीं मिला है। इससे पहले राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार द्वारा उन्हें सात बार सेवा विस्तार दिया जा चुका था। वर्ष 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह की सिफारिश पर अखिलेश यादव सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश बुलाया था। फतेहपुर और बुलंदशहर में जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद जब वे रामपुर के डीएम बने, तो उनके फैसलों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी।

​बयानबाजी के बाद एक्शन मोड में आया था प्रशासन

​रामपुर में पदस्थी के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और प्रशासन के बीच तल्खी बेहद बढ़ गई थी। आजम खान ने मंच से प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर बेहद तल्ख और अपमानजनक टिप्पणी की थी। इस बयानबाजी के बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई। एक के बाद एक पुरानी फाइलें खुलती चली गईं और अवैध कब्जों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई शुरू हुई। इन कार्यवाहियों के परिणामस्वरूप न केवल कानून-व्यवस्था सख्त हुई, बल्कि आजम खान और उनके पुत्र की विधायकी भी समाप्त हो गई और दोनों को न्यायिक मामलों में सजा का सामना करना पड़ा।

​अवैध गेट गिराने से लेकर सबस्टेशन मुक्ति तक


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​अपने कार्यकाल की प्रमुख कार्यवाहियों का जिक्र करते हुए आईएएस आन्जनेय सिंह ने तीन बड़े मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया था। पहला मामला रामपुर में पीडब्ल्यूडी सड़क पर बने अनधिकृत उर्दू गेट का था, जिसने यातायात को पूरी तरह बाधित कर रखा था। जब फाइलों की समीक्षा की गई तो पता चला कि इसे गिराने का आदेश पूर्व में ही हो चुका था, जिसके बाद तत्काल बल प्रयोग कर उस अवैध ढांचे को ध्वस्त कराया गया। दूसरा मामला जौहर यूनिवर्सिटी की चारदीवारी के भीतर कैद सरकारी बिजली सबस्टेशन का था। सरकारी धन से बने इस सबस्टेशन पर आम जनता की पहुंच बंद कर दी गई थी, जिसे प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया।

​यूनानी चिकित्सालय की जमीन को कराया कब्जामुक्त

​तीसरा प्रमुख मामला रामपुर पब्लिक स्कूल से जुड़ा था, जो यूनानी चिकित्सालय की जमीन पर अवैध रूप से संचालित हो रहा था। जांच में पाया गया कि कागजों पर मदरसा आलिया की जमीन लीज पर दिखाने का दावा किया गया था, जबकि वास्तव में स्कूल अस्पताल की जमीन पर बना था। साजिशन बंद कराए गए यूनानी अस्पताल की जमीन को छुट्टी के दिन पुलिस बल भेजकर खाली कराया गया। रामपुर पब्लिक स्कूल समेत कई अन्य अवैध संपत्तियों पर हुई इस सिलसिलेवार कार्रवाई ने क्षेत्र में कानून के शासन का कड़ा संदेश दिया था।

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