उत्तर प्रदेश कैडर में पिछले 11 वर्षों से कार्यरत 2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह एक बार फिर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर के रूप में तैनात आंजनेय कुमार सिंह की प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) की अवधि 14 अगस्त को समाप्त हो गई है। नए आदेश की प्रतीक्षा के बीच वह मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया को चार्ज सौंपकर अवकाश पर चले गए हैं।

​2015 से यूपी में दे रहे सेवाएं

​सिक्किम कैडर के अधिकारी होने के बावजूद आंजनेय कुमार सिंह वर्ष 2015 से अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश में तैनात हैं। तत्कालीन सपा सरकार में वह बुलंदशहर के जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके बाद भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी उनके कार्यों को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर प्रतिनियुक्ति का विस्तार किया जाता रहा। अब तक उन्हें कुल 7 बार सेवा विस्तार मिल चुका है, जो प्रशासनिक नियमों में एक दुर्लभ मिसाल माना जाता है।

​एक ही कमिश्नरी में सबसे लंबा कार्यकाल

​आंजनेय कुमार सिंह मार्च 2021 से लगातार मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। करीब साढ़े पांच वर्षों से अधिक समय तक एक ही मंडल में कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं देने का यह एक अनोखा रिकॉर्ड है। प्रदेश के अन्य किसी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नाम एक ही कमिश्नरी में इतने लंबे समय तक पदस्थ रहने का रिकॉर्ड दर्ज नहीं है।

​रामपुर डीएम और आजम खान प्रकरण

​प्रशासनिक गलियारों में आंजनेय कुमार सिंह सबसे ज्यादा सुर्खियों में तब आए, जब वह रामपुर के जिलाधिकारी थे। रामपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके करीबियों के खिलाफ बड़े स्तर पर सख्त विधिक कार्रवाई की। रामपुर के मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को अवैध घोषित कर ध्वस्त करने से जुड़े प्रकरण की प्रशासनिक अपील याचिका पर सुनवाई भी कमिश्नर कोर्ट के रूप में उन्हीं की अदालत में लंबित रही।


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​नए आदेश का इंतजार

​राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार द्वारा उनके आठवें सेवा विस्तार के संबंध में निर्णय लिया जाना बाकी है। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्रतिनियुक्ति बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, जब तक केंद्र सरकार और कार्मिक मंत्रालय से औपचारिक स्वीकृति का आदेश जारी नहीं होता, तब तक प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उनका प्रभार स्थानीय प्रशासन को सौंपा गया है।

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