देवरिया। उत्तर प्रदेश के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर को UP पुलिस ने उस वक्त हिरासत में ले लिया जब वह लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे। शाहजहांपुर में ट्रेन में सवार सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें उतार लिया। यह कार्रवाई हाल ही में देवरिया से जुड़े एक पुराने मामले में उनके खिलाफ दर्ज हुए केस से जुड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम जांच में सहयोग न करने के बाद उठाया गया है। गिरफ्तारी के बाद अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी का X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया गया है।

कौन हैं IPS अमिताभ ठाकुर?
अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अपनी पहली पोस्टिंग ASP के रूप में गोरखपुर में प्राप्त की थी, जबकि SP के रूप में उनकी पहली तैनाती पिथौरागढ़ में हुई थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं। उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 23 मार्च, 2021 को गृह मंत्रालय ने उन्हें समय से पहले रिटायर कर दिया था।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
अमिताभ ठाकुर दिल्ली के लिए यात्रा कर रहे थे। रात करीब 1:50 बजे सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी शाहजहांपुर में ट्रेन में चढ़े और उन्हें अपने साथ ले गए। शुरू में यह मामला अपहरण जैसा लगा, लेकिन बाद में लखनऊ पुलिस ने उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को फोन पर गिरफ्तारी की पुष्टि की।
क्या है 1999 का देवरिया फ्रॉड केस?
यह मामला राजाजीपुरम के संजय शर्मा द्वारा तालकटोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है।
- आरोप: शिकायत के अनुसार, IPS अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने जिला उद्योग केंद्र, देवरिया में इंडस्ट्रियल प्लॉट नंबर B-2 का आवंटन फर्जी नाम "नूतन देवी" से हासिल किया था।
- फर्जी पहचान: आवंटन के लिए पति का नाम भी "अभिजात/अभिताप ठाकुर" जैसे नकली नाम के साथ-साथ बिहार के सीतामढ़ी का एक फर्जी पता इस्तेमाल किया गया था।
- दस्तावेज़ों का दुरुपयोग: आरोप है कि सरकारी विभागों को धोखा देने के लिए आवेदन पत्र, शपथ पत्र (एफिडेविट), ट्रेजरी चालान और ट्रांसफर डीड सहित कई जाली दस्तावेज़ बनाए गए थे।
- आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल: पुलिस ने यह भी कहा कि उस समय जिला पुलिस प्रमुख के रूप में, अमिताभ ठाकुर ने कथित तौर पर इस धोखाधड़ी वाले आवंटन को आसान बनाने और बचाने के लिए अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल किया था।
- प्लॉट की बिक्री: बाद में, असली पहचान का इस्तेमाल करके इस प्लॉट को बेच दिया गया, जिससे सरकारी विभाग, बैंक और अन्य हितधारक सालों तक धोखे में रहे।
इस शिकायत के आधार पर, 12 सितंबर, 2025 को तालकटोरा पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 34 और 120-B के तहत FIR दर्ज की गई थी।
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