उत्तर प्रदेश के देवरिया और मेरठ जिलों में सरकारी विद्यालयों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने और विभाग की छवि धूमिल करने के आरोप में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों और विभागीय अधिकारियों की सजगता के बाद पुलिस ने संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

​देवरिया जिले के गौरीबाजार थाना क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय डमरभिसवा में रविवार को छुट्टी के दिन एक युवक ने बिना अनुमति चहारदीवारी फांदकर विद्यालय परिसर में प्रवेश किया। उसने नीलामी के बाद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में पड़े मलबे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। खंड शिक्षा अधिकारी की तहरीर के बाद पुलिस ने विभाग की छवि खराब करने और दुष्प्रचार करने के आरोप में केस दर्ज कर लिया है।

​मेरठ के सरूरपुर ब्लॉक स्थित कालंद गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी ऐसा ही मामला सामने आया है। वहां परिसर के भीतर घुसकर अव्यवस्थाओं को दर्शाते हुए वीडियो बनाया गया और फेसबुक पर अपलोड कर दिया गया। वीडियो के तेजी से प्रसारित होने पर सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चालान कर दिया।

​इन घटनाओं के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर द्वारा बिना अनुमति परिसर में प्रवेश कर वीडियो बनाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


Advertisement

​हालांकि, इस पूरी कार्रवाई के बाद एक अलग बहस भी शुरू हो गई है। कई लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकारी तंत्र अपनी कमियों और असफलताओं को उजागर होने से रोकने की कोशिश कर रहा है। देश में सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कई स्थानों पर विद्यालय भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं, पेय जल और शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, और शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इसके अलावा, उपलब्ध शिक्षकों को भी अक्सर गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रखा जाता है, जिससे पठन-पाठन का कार्य प्रभावित होता है।

​ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सुधार करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के बजाय वीडियो बनाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसना किस हद तक जायज है।

स्कूल परिसरों में अनधिकृत प्रवेश पर रोक

​इन घटनाओं के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर द्वारा बिना अनुमति परिसर में प्रवेश कर वीडियो बनाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

---समाप्त---