जेफरी एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की फाइलों का सार्वजनिक होना केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक 'परमाणु विस्फोट' के समान है। दशकों तक सत्ता के गलियारों में छिपे इस काले सच के सामने आने में अब बस कुछ ही समय बचा है। कानूनी रूप से इन फाइलों को सार्वजनिक करने की अंतिम समय सीमा 18 दिसंबर थी, जिसका सीधा अर्थ है कि अब किसी भी पल ये दस्तावेज पब्लिक डोमेन में आकर तहलका मचाना शुरू कर देंगे। अमेरिकी संसद द्वारा पारित बिल ने न्याय विभाग (DOJ) के लिए इन गोपनीय रिकॉर्ड्स को उजागर करना अनिवार्य कर दिया है, जिससे उन रसूखदारों की सांसें अटकी हुई हैं जो अब तक खुद को सुरक्षित समझ रहे थे।

    एपस्टीन के साथ डोनाल्ड ट्रंप की एक तस्वीर  

​हाल ही में इस 'आर्काइव' की एक छोटी झलक के रूप में 19 तस्वीरें जारी की गईं, जिनमें डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन और बिल गेट्स जैसी विश्वप्रसिद्ध हस्तियां एपस्टीन के साथ नजर आईं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो केवल "हिमशैल का सिरा" (Tip of the iceberg) है। असली धमाका तो उन हजारों ईमेल, कॉल लॉग्स और गवाहों के बयानों से होगा, जो एपस्टीन के उस काले साम्राज्य की गवाही देंगे। सबसे ज्यादा चर्चा 'लोलिता एक्सप्रेस' के फ्लाइट मेनिफेस्टो को लेकर है, जिसमें दर्ज हर नाम दुनिया के सामने एक नई हकीकत पेश करेगा।

एपस्टीन के साथ डोनाल्ड ट्रंप की एक ओर तस्वीर 

​इस महा-खुलासे की आंच अब भारत तक भी पहुँचती दिख रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी भारतीय का नाम अपराधी के रूप में सामने नहीं आया है, लेकिन वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी के दावों ने देश के भीतर खलबली मचा दी है। स्वामी ने सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावा किया है कि इस सूची में भारत के कुछ वर्तमान और पूर्व मंत्रियों के साथ-साथ सांसदों के नाम भी हो सकते हैं। उनका मानना है कि एपस्टीन का नेटवर्क इतना गहरा था कि इसमें दुनिया भर के प्रभावशाली लोगों को फंसाया गया था। चूंकि एपस्टीन केवल एक अपराधी नहीं बल्कि एक बड़ा 'नेटवर्कर' था, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि उसके तार वॉल स्ट्रीट से लेकर बॉलीवुड और भारतीय व्यापारिक घरानों तक जुड़े हो सकते हैं।

तस्वीर में दिखे कुछ अन्य नेता

​भारतीय हलकों में बढ़ती इस बेचैनी के पीछे साख का बड़ा सवाल खड़ा है। यदि किसी भी बड़े भारतीय व्यक्तित्व का नाम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन फाइलों में आता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को गहरा धक्का पहुँचा सकता है। सबसे गंभीर पहलू 'ब्लैकमेलिंग' का है; आरोप हैं कि एपस्टीन शक्तिशाली लोगों को आपत्तिजनक स्थितियों में फंसाकर उनकी रिकॉर्डिंग करता था। अगर ऐसा कोई भारतीय नाम सामने आता है, तो यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील हो सकता है।


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​राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी यह स्थिति किसी दोधारी तलवार से कम नहीं है। एक तरफ उन्होंने फाइलों को सार्वजनिक करने वाले बिल पर हस्ताक्षर कर खुद को सच्चाई का साथ देने वाला नेता बताया है, वहीं दूसरी तरफ 2002 में एपस्टीन को "शानदार आदमी" बताने वाला उनका पुराना बयान विरोधियों के हाथ में बड़ा हथियार दे रहा है। हालांकि ट्रंप का पक्ष साफ है कि 2004 में एक जमीन की नीलामी के विवाद के बाद उन्होंने एपस्टीन से हमेशा के लिए संबंध तोड़ लिए थे।

​अब अगले कुछ घंटे पूरी दुनिया के लिए निर्णायक होने वाले हैं। यदि ये फाइलें बिना किसी सेंसर के जारी होती हैं, तो कई देशों में सरकारें गिर सकती हैं और बड़े व्यापारिक साम्राज्य ढह सकते हैं। एपस्टीन के निजी द्वीप 'लिटिल सेंट जेम्स' पर आने वाले मेहमानों की असली सूची और यौन तस्करी के नेटवर्क में शामिल अन्य सहयोगियों के नाम सामने आना तय है। यह अब केवल एक आपराधिक केस नहीं रहा, बल्कि आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा 'पॉवर करप्शन' स्कैंडल बन चुका है।

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