नई दिल्ली (उत्तराखण्ड तहलका): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एक नई चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में उन्हें ब्रिटेन के हथियार डीलर संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पहली बार औपचारिक तौर पर आरोपी बनाया गया है। यह घटनाक्रम वाड्रा के खिलाफ चल रही तीन धनशोधन जांचों में से एक में एक बड़ा मोड़ है। इस केस में नामजद होने वाले वाड्रा नौवें व्यक्ति बन गए हैं। अन्य प्रमुख आरोपियों में संजय भंडारी, सुमित चड्ढा, संजीव कपूर, अनिरुद्ध वाधवा और कई संबंधित कंपनियाँ शामिल हैं। 

न्यायालय में अगली कार्रवाई और कानूनी आधार

ED ने यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जुलाई में वाड्रा का बयान रिकॉर्ड करने के बाद की है। हालाँकि, पिछले महीने पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर, वाड्रा ने बीमारी और विदेश यात्रा का हवाला देकर मोहलत मांगी थी। राउज़ एवेन्यू कोर्ट अब इस चार्जशीट पर विचार करेगा, जिसके लिए अगली तारीख छह दिसंबर तय की गई है।

आरोपों का केंद्र बिंदु: लंदन की प्रॉपर्टी और फंडिंग


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ED का पूरा मामला इस बात पर केंद्रित है कि संजय भंडारी ने 2009 में लंदन में एक संपत्ति खरीदी और कथित तौर पर वाड्रा के निर्देशों पर उसका नवीनीकरण (रेनोवेशन) करवाया। आरोप है कि इस काम के लिए धनराशि वाड्रा ने उपलब्ध कराई थी। हालांकि, वाड्रा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए, लंदन में किसी भी संपत्ति के मालिक होने से इनकार करते हैं।

​अन्य संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले

​यह केस ED द्वारा वाड्रा के खिलाफ की जा रही तीन मनी लॉन्ड्रिंग जाँचों में से एक है। अन्य दो मामले हरियाणा और राजस्थान में ज़मीन के सौदों में कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं।

​संजय भंडारी की स्थिति: प्रत्यर्पण की अनिश्चितता

​इस केस का एक और महत्वपूर्ण पहलू संजय भंडारी हैं, जो वर्ष 2016 में भारत से भाग गए थे और इस साल उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। हालाँकि, हाल ही में ब्रिटेन की एक अदालत में हुए घटनाक्रमों ने उनके भारत में प्रत्यर्पण की संभावना को काफी कम कर दिया है।

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ED की इस नई चार्जशीट ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया को और तेज़ कर दिया है। छह दिसंबर को कोर्ट का विचार यह तय करेगा कि आगे इस मामले में क्या रुख लिया जाएगा।

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