उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई ने शिकंजा कस दिया है। झांसी में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर द्वारा 70 लाख की रिश्वत के बड़े मामले के तुरंत बाद, बस्ती में बैंक मैनेजर और कर्मचारी को ऋण की दूसरी किश्त के बदले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
सिस्टम में गहराती भ्रष्टाचार की जड़ें
उत्तर प्रदेश में सरकारी तंत्र के भीतर पनप रही रिश्वतखोरी की मानसिकता खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अभी झांसी में सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी द्वारा 70 लाख रुपये की मोटी रकम डकारने का मामला पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि सीबीआई ने एक और कार्रवाई कर हड़कंप मचा दिया है। यह ताजा मामला बस्ती जिले का है, जहाँ यूपी ग्रामीण बैंक की मखौड़ाधाम शाखा में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों ने एक छोटे दुकानदार को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की। यह घटनाएं साबित करती हैं कि सफेदपोश अधिकारियों के लिए आम आदमी की मेहनत और सरकारी योजनाएं महज अवैध उगाही का जरिया बनकर रह गई हैं।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में सेंधमारी
बस्ती के पांवड़ गांव निवासी सचिन मौर्या ने अपने छोटे से व्यापार को विस्तार देने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का सहारा लिया था। उसने पांच लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया, जिसमें से पहली किश्त के रूप में उसे दो लाख 72 हजार रुपये प्राप्त हो गए थे। विडंबना देखिए कि जिस बैंक मैनेजर नवीन सिंह कुलदीप को उद्यमी की मदद करनी चाहिए थी, वही उसकी राह का कांटा बन गया। शेष राशि जारी करने के बदले में मैनेजर ने अपने कर्मचारी अनिल कुमार के माध्यम से 15 हजार रुपये की मांग रख दी। पीड़ित ने जब तक घूस नहीं दी, तब तक उसकी फाइल को रद्दी के ढेर में दबाए रखा गया। अंततः सीबीआई ने जाल बिछाकर इन दोनों ही आरोपियों को नोटों के साथ दबोच लिया।
जीएसटी विभाग का वो सत्तर लाख का दाग
इस गिरफ्तारी से ठीक एक सप्ताह पहले झांसी में जो हुआ, उसने पूरे प्रशासनिक अमले को शर्मसार कर दिया था। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने आईआरएस अधिकारी और सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के उस सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था, जो 70 लाख रुपये जैसी भारी-भरकम राशि की सौदेबाजी कर रहा था। इस मामले में न केवल अधिकारी, बल्कि वकील और व्यापारी भी भ्रष्टाचार की इस कड़ी का हिस्सा पाए गए थे। हालांकि विभाग ने प्रभा भंडारी और उनके दो अधीक्षकों को निलंबित कर दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या निलंबन और गिरफ्तारी मात्र से व्यवस्था में पैठ बना चुके इन 'दीमकों' का अंत हो पाएगा? सीबीआई अब इन दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर इनके अन्य कारनामों की परतें खोलने की तैयारी में है।
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