कनाडा की सरकार ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। रॉयल कनाडाई माउंटेड पुलिस की नवीनतम गोपनीय रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया गया है कि साबरमती जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर ड्रग तस्करी और हत्या जैसे अपराधों को अंजाम दे रहा है। ग्लोबल न्यूज द्वारा सार्वजनिक किए गए इन दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि भारतीय सरकारी अधिकारी बिश्नोई गिरोह का इस्तेमाल उन लोगों को ठिकाने लगाने के लिए कर रहे हैं जिन्हें भारत अपने लिए खतरा मानता है। यह रिपोर्ट उस समय लीक हुई है जब उम्मीद की जा रही थी कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत की पटरी दोबारा लौटेगी, लेकिन इन दावों ने सुलह की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। लॉरेंस वर्तमान में गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, लेकिन ग्लोबल न्यूज के दावों पर अब तक भारत सरकार या गुजरात जेल विभाग की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जेल से संचालित वैश्विक सिंडिकेट और निज्जर हत्याकांड का सच
कनाडाई प्रशासन का सीधा आरोप है कि जून 2023 में सरे में हुई हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और विनिपेग में सुखदूल सिंह की मौत के पीछे बिश्नोई गिरोह का हाथ था, जिसे कथित तौर पर भारतीय सुरक्षा तंत्र का समर्थन प्राप्त था। रिपोर्ट के अनुसार, बिश्नोई 2015 से सलाखों के पीछे है, फिर भी वह गोल्डी बराड़ जैसे सहयोगियों के माध्यम से उत्तरी अमेरिका और यूरोप में फैले अपने सात सौ से अधिक सदस्यों के नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा है। कनाडा का दावा है कि उनके पास ऐसे संदेश और तकनीकी साक्ष्य मौजूद हैं जो निज्जर की हत्या की साजिश को सीधे वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ जोड़ते हैं। कनाडा ने पहली बार 15 अक्तूबर 2024 को सार्वजनिक रूप से भारतीय एजेंटों पर बिश्नोई गिरोह के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को हास्यास्पद और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया था, जिसके जवाब में छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया गया था।
अमेरिका में पन्नू केस और भारतीय सुरक्षा अधिकारी की संदिग्ध भूमिका
भारत सरकार की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों की आंच अब केवल कनाडा तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका में भी इसके गंभीर परिणाम दिख रहे हैं। भारत सरकार पर आरोप है कि उसने अमेरिका में सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के लिए निखिल गुप्ता को ठेका दिया था, जो वर्तमान में अमेरिका की जेल में बंद है। इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब भारतीय सुरक्षा अधिकारी विकास यादव का नाम सामने आया। आरोप है कि भारत सरकार ने विकास यादव को अमेरिका प्रत्यर्पित होने से रोकने के लिए उस पर भारत में ही एक फर्जी केस दर्ज कर जेल में रखा हुआ है। ट्रूडो ने आरोप लगाया है कि कई देशों की जांच एजेंसियों ने इस बात की पुष्टि की है कि भारतीय एजेंटों ने विदेशी धरती पर हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। एडमॉन्टन में रहने वाले करण बराड़, कमलप्रीत सिंह और करणप्रीत सिंह की गिरफ्तारी इसी बड़ी साजिश का हिस्सा मानी जा रही है।
कूटनीतिक गतिरोध और अंतरराष्ट्रीय साख पर बढ़ता खतरा
ओटावा और नई दिल्ली के बीच बढ़ता यह तनाव न केवल द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली को भी संदेह के घेरे में खड़ा कर रहा है। एक तरफ जहां भारत ने ओटावा से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह विमर्श तेज हो गया है कि क्या कोई कैदी राज्य की मशीनरी की मदद के बिना इतनी बड़ी वारदातों को अंजाम दे सकता है। ये आरोप न केवल भारत की जेल व्यवस्था की विफलता की ओर इशारा करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की लोकतांत्रिक और कानून सम्मत छवि को भी प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि भारत इन अंतरराष्ट्रीय आरोपों का कानूनी और कूटनीतिक रूप से किस प्रकार सामना करता है।
---समाप्त---