पत्रकारों से रूबरू होते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने केंद्रीय बजट 2026 को देश की प्रगति का एक ठोस ब्लूप्रिंट करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बजट केवल एक वित्तीय लेखा-जोखा नहीं है बल्कि विकसित भारत की सशक्त सामर्थ्य और संभावनाओं को साकार करने वाला दस्तावेज़ है। नकवी के अनुसार आज भारत वैश्विक मंच पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है और आर्थिक मंदी के अंतरराष्ट्रीय माहौल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था का निरंतर मजबूत बने रहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह से समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है उससे भारत किसी भी बाहरी आर्थिक दबाव के सामने झुकने के बजाय अधिक सक्षम और शक्तिशाली बनकर उभरा है।
सुशासन की शक्ति और वैश्विक संकट के बीच आर्थिक स्थिरता
नकवी ने देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि मोदी सरकार ने विरासत में मिली बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि आज भारत सुशासन और समावेशी सशक्तिकरण का एक वैश्विक ब्रांड बन चुका है। राजनीतिक असहिष्णुता के पुराने दौर को पीछे छोड़ते हुए सरकार ने हर वर्ग तक विकास पहुँचाने का काम किया है। उनके मुताबिक जब दुनिया के बड़े-बड़े देश संकट और कठिनाइयों के दौर से गुजर रहे हैं तब भारत आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह स्थिरता इसलिए संभव हो पाई है क्योंकि सरकार ने बाहरी बाधाओं और आंतरिक व्यवधानों की परवाह किए बिना केवल जनहित को सर्वोपरि रखा है।

तर्कों की कंगाली और विपक्ष की कुंठित राजनीति का दौर
विपक्षी दलों द्वारा बजट की जा रही आलोचना पर प्रहार करते हुए नकवी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दल अब तर्कों की कंगाली से जूझ रहे हैं जिसके कारण वे केवल कुतर्कों का सहारा ले रहे हैं। नकवी ने तंज कसा कि विपक्षी दल अपनी हार के प्रमाणपत्रों का प्रदर्शन करने में व्यस्त हैं और चुनावी मैदान में बहादुरी दिखाने के बजाय रण छोड़ने की प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उनके अनुसार विपक्ष का कुनबा अब कुंठा और कटुता के कबाड़खाने में कैद हो गया है। प्रजातंत्र को परिवार तंत्र के अधीन रखने की उनकी कोशिशें अब जनता के सामने विफल साबित हो रही हैं और यही कारण है कि वे लगातार जनादेश से दूर होते जा रहे हैं।
संवैधानिक संस्थाओं का अपमान और विरासत की सियासत का अंत
अपने संबोधन के दौरान नकवी ने विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थानों को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सत्तालोलुप नेताओं द्वारा संस्थानों की सामंती लिंचिंग करने की सनक उनके राजनीतिक भविष्य को समाप्त कर रही है। भाजपा की विजय के समीकरणों ने वंशवाद की राजनीति के गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। नकवी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे एक ऐसी बेनामी संपत्ति बताया जिसका अब कोई मोल नहीं रह गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनता अब छद्म सेक्युलरिज्म के जाल में फंसने वाली नहीं है क्योंकि देश अब विकास को चुन रहा है और वंशवाद को पूरी तरह खारिज कर रहा है।
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