बाराबंकी की शांत फिजाओं में मंगलवार को उस वक्त अचानक भारी तनाव पैदा हो गया जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और एटीएस की गाड़ियों ने सफेदाबाद के हिंद अस्पताल को घेर लिया। अस्पताल के भीतर लोग सामान्य दिनचर्या में थे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रामलखन नामक युवक था, जो अपनी बीमार मां के पास बैठा था। किसी को कानो-कान खबर नहीं हुई और पलक झपकते ही एजेंसियों ने उसे हिरासत में ले लिया। मां के ऑपरेशन के बीच बेटे का इस तरह पकड़ा जाना पूरे अस्पताल परिसर में चर्चा का विषय बन गया, लेकिन असली सस्पेंस तब शुरू हुआ जब एजेंसियों का काफिला युवक के पैतृक गांव की ओर मुड़ा।
खोर एत्मादपुर की गलियों में गूंजती आधुनिक मशीनों की आहट
जब एनआईए और एटीएस की संयुक्त टीमें बदोसराय क्षेत्र के ग्राम खोर एत्मादपुर पहुंचीं, तो ग्रामीणों को अंदाजा भी नहीं था कि उनके बीच रहने वाले किसी व्यक्ति पर इतने गंभीर संदेह हो सकते हैं। स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर रामलखन के घर की घेराबंदी की गई और फिर शुरू हुआ एक ऐसा तलाशी अभियान जिसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। एजेंसियों ने साधारण तलाशी के बजाय आधुनिक डिटेक्टरों और मशीनों का सहारा लिया, जिससे यह अंदेशा गहरा गया कि एजेंसियां किसी बड़ी और खतरनाक साजिश के सबूत तलाश रही हैं। घर का कोना-कोना खंगाला गया, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे क्या मिला, इसे एजेंसियों ने फिलहाल एक राज ही बना रखा है।
जांच के घेरे में 'गुप्त कनेक्शन' और पुलिस की चुप्पी
गांव की चौपालों से लेकर शहर के गलियारों तक अब सिर्फ एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर रामलखन का आतंकी गतिविधियों से क्या लेना-देना हो सकता है। पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय के बयान ने इस रहस्य को और उलझा दिया है, क्योंकि उन्होंने रेड की पुष्टि तो की लेकिन रामलखन की सटीक भूमिका पर कुछ भी बोलने से परहेज किया। एजेंसियों की इस चुप्पी ने गांव में दहशत के साथ-साथ कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का सिरा है या फिर कोई गहरी साजिश? फिलहाल जांच की आंच अभी ठंडी नहीं हुई है और आने वाले दिनों में किसी बड़े खुलासे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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