बांग्लादेश के प्रमुख छात्र नेता और 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद वहां की स्थिति एक बार फिर बेहद चिंताजनक हो गई है। सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी के निधन की खबर सार्वजनिक होते ही ढाका समेत कई शहरों में हिंसक प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है। आज शनिवार, 20 दिसंबर को होने वाले उनके अंतिम संस्कार के मद्देनजर व्यापक हिंसा की आशंका को देखते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए तत्काल सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इन देशों ने बांग्लादेश में मौजूद अपने नागरिकों को विशेष रूप से ढाका के मानिक मिया एवेन्यू जैसे क्षेत्रों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है, जहाँ उस्मान हादी के जनाजे की नमाज के दौरान भारी भीड़ जुटने और हालात बिगड़ने का अंदेशा है।
अमेरिकी दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि शांतिपूर्ण सभाएं भी अचानक हिंसक रूप ले सकती हैं, इसलिए विदेशी नागरिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें और स्थानीय मीडिया की खबरों पर नजर रखें। दूतावास ने यह चेतावनी उस्मान हादी की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों द्वारा बांग्लादेश के प्रमुख अखबारों 'प्रोथोम आलो' और 'द डेली स्टार' के कार्यालयों में की गई तोड़फोड़ और आगजनी को देखते हुए दी है। ढाका की सड़कों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और सरकार ने संसद भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
भारत ने भी बांग्लादेश के इन हालातों पर अपनी गहरी नजर बनाए रखी है। सीमा पार भड़की हिंसा और भारत विरोधी नारेबाजी के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में मौजूद अपने केंद्रों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। एहतियात के तौर पर भारत ने बांग्लादेश से लगी अपनी सीमाओं, विशेषकर त्रिपुरा और मिजोरम में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया है। पूर्वी सेना कमान के वरिष्ठ जनरल ने खुद सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि पड़ोसी देश की अस्थिरता और वहां सक्रिय चरमपंथी तत्वों का कोई भी दुष्प्रभाव भारतीय सीमाओं के भीतर न पहुंच सके।
भारत के लिए यह संकट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संसदीय समिति ने बांग्लादेश के वर्तमान हालातों को 1971 के बाद की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया है। एक तरफ जहां फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों से पहले वहां की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रही है, वहीं उस्मान हादी जैसे बड़े नेताओं की हत्या ने अशांति को नया मोड़ दे दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय बांग्लादेश की स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है, क्योंकि वहां की अस्थिरता का असर पूरे दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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