न्यूजीलैंड के दक्षिण ऑकलैंड में आज उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब प्रवासी भारतीय सिखों द्वारा आयोजित एक धार्मिक नगर कीर्तन के सामने कट्टरपंथी समूह 'ट्रू पैट्रियट्स ऑफ एनजे' ने विरोध प्रदर्शन किया। 'डेस्टिनी चर्च' से जुड़े इस समूह ने प्रदर्शन के दौरान एक विवादित बैनर लहराया जिस पर लिखा था, "यह न्यूजीलैंड है, भारत नहीं।"

धार्मिक यात्रा में बाधा डालने का प्रयास

​मनुरेवा स्थित नानकसर सिख गुरुद्वारा साहिब द्वारा आयोजित इस नगर कीर्तन में सैकड़ों प्रवासी भारतीय सिख शामिल थे। यह जुलूस ग्रेट साउथ रोड पर लगभग पांच किलोमीटर की दूरी तय कर रहा था। जब श्रद्धालु शांतिपूर्वक गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया में वापस गुरुद्वारा साहिब लौट रहे थे, तभी "कीप एनजे, एनजे" की टी-शर्ट पहने प्रदर्शनकारियों ने उनके सामने हाका (पारंपरिक युद्ध नृत्य) करना शुरू कर दिया।

क्या साबित करना चाहता था 'ट्रू पैट्रियट्स ऑफ एनजे'?


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​इस विरोध प्रदर्शन के जरिए कट्टरपंथी समूह ने अपनी विभाजनकारी विचारधारा को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की कोशिश की। उनके इस कृत्य के पीछे मुख्य उद्देश्य सांस्कृतिक प्रभुत्व स्थापित करना था। हाका और विवादित बैनरों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वे न्यूजीलैंड की बहुसांस्कृतिक पहचान को स्वीकार नहीं करते हैं।

​यह समूह खुद को "कीवी जीवन शैली का रक्षक" बताता है और खुले तौर पर प्रवासी भारतीय सिखों तथा अन्य प्रवासियों के खिलाफ खड़ा है। उनका एजेंडा न्यूजीलैंड को एक "कट्टर ईसाई राष्ट्र" के रूप में पेश करना है, जहाँ गैर-ईसाई धर्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन को वे एक चुनौती के रूप में देखते हैं। इस प्रदर्शन के जरिए वे प्रवासन (Immigration) के प्रति अपना विरोध और प्रवासी समुदायों के बीच भय का माहौल पैदा करना चाहते थे।

श्रद्धालुओं का संयम और सेवा भाव

​जुलूस में शामिल प्रवासी भारतीय सिख और आव्रजन सलाहकार सनी सिंह ने बताया कि प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा साहिब के मुख्य द्वार के पास घात लगाकर बैठे थे। उन्होंने कहा, "जब हम वापस पहुंचे, तब उन्होंने हाका शुरू किया। हम पूरी तरह शांत रहे क्योंकि हमारे साथ पावन गुरु ग्रंथ साहिब थे।" इस दौरान प्रवासी भारतीय सिख सेवा में जुटे थे और लोगों को पिज्जा, पानी और छबील बांट रहे थे।

प्रवासी समाज में गहरा रोष

​स्थानीय नेता मार्शल वालिया ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय सिख समुदाय न्यूजीलैंड का एक सम्मानित और सेवाभावी हिस्सा है। उन्होंने याद दिलाया कि कोविड-19 के संकट के दौरान इन प्रवासी भारतीय सिखों ने गुरुद्वारा साहिब के माध्यम से पूरे देश में राहत कार्य किए थे, ऐसे में उन्हें इस तरह निशाना बनाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

पुलिस की मुस्तैदी

​स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए लगभग 50 प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया ताकि प्रवासी भारतीय सिखों का जुलूस सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके। पुलिस इंस्पेक्टर मैट होयस ने कहा कि किसी भी समुदाय के धार्मिक और कानूनी अधिकारों में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने घटना के बाद भी क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखी ताकि प्रवासी समुदाय सुरक्षित महसूस कर सके।

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