ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रयागराज प्रशासन के उस क्रूर चेहरे को बेनकाब किया है जिसे देखकर पूरा देश स्तब्ध है। शंकराचार्य ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर उनके साथ जो कुछ भी हुआ, वह कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वे खुद स्थानीय पुलिस के साथ संगम तट के लिए निकले थे, तो अचानक बैरिकेड का विवाद कैसे पैदा हो गया? शंकराचार्य ने दावा किया कि पुलिस ने ही वार्ता कर बैरिकेड खुलवाए थे और अब उन्हीं पर नियम तोड़ने का झूठा आरोप मढ़ा जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को ललकारते हुए कहा कि अगर संतों ने कोई उद्दंडता की है, तो सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? यह पूरा घटनाक्रम यह बताता है कि सत्ता के मद में चूर अफसरशाही अब संतों के मान-मर्दन पर उतारू हो गई है।

​'हत्या की थी मंशा': पानीपत के युद्ध जैसी बिछाई गई थी साजिश

​शंकराचार्य ने एक रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा करते हुए कहा कि रविवार को उनकी मृत्यु भी हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुबह से शाम तक उन्हें पालकी में बंधक जैसी स्थिति में रखकर प्रशासन एक ऐसी स्थिति पैदा करना चाहता था जिसमें भगदड़ मच जाए। उन्होंने 1762 के पानीपत युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह विश्वास राव के हाथी से उतरते ही सेना में भगदड़ मची थी, ठीक उसी तरह अधिकारी उन्हें पालकी से उतारकर हमला करना चाहते थे ताकि भगदड़ में उनकी जान ली जा सके। उन्होंने सादे कपड़ों में हथियारबंद जवानों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके संन्यासी जीवन के 25 वर्षों में यह पहली बार था जब उन्हें उनके लोगों से अलग कर अकेले किले के पास ले जाया गया। यह व्यवहार किसी आध्यात्मिक गुरु के साथ नहीं बल्कि एक अपराधी के साथ किए जाने वाले बर्ताव जैसा था।

मासूम बटुकों की चोटी पकड़ी और बुजुर्ग संतों को जूतों से मारा

​प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे हृदयविदारक दृश्य तब था जब शंकराचार्य ने एक बटुक का खून से सना हुआ दुपट्टा मीडिया के सामने लहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह सचिव और पुलिस कमिश्नर जैसे अधिकारियों ने स्वयं अपने हाथों से दंडी स्वामियों और बाल बटुकों को पीटा। उन्होंने कहा कि नेपाल से आए एक बुजुर्ग संत को चोटी से पकड़कर घसीटा गया और उन पर जूतों से प्रहार किए गए। शंकराचार्य के शब्दों में, "शायद रावण भी इतनी निर्दयता न करता जितनी इस प्रशासन ने की है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कमिश्नर ने अत्यंत हठधर्मी और दुष्टता भरा व्यवहार किया और संतों को अपमानित करने के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। यह कृत्य उन हजारों पुलिसकर्मियों के लिए भी शर्मिंदगी का विषय था जो अपने अधिकारियों की इस बर्बरता को देख रहे थे।

गौ माता की हत्या का चंदा लेने वाले क्या करेंगे धर्म की रक्षा?

​स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पूरी प्रताड़ना के पीछे के असली कारणों की ओर इशारा करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चूँकि वे गौ माता की हत्या के विरुद्ध आवाज उठा रहे हैं और गौ-रक्षा की बात कर रहे हैं, इसीलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकारें गौ-हत्या करने वालों से चंदा ले रही हैं और इसीलिए उन्हें सनातन धर्म के रक्षक शंकराचार्य फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और उनके अधीन काम कर रहे अधिकारियों को 'मंदिर तोड़ने वाला' और 'झूठा' करार दिया। शंकराचार्य ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी अनशन पर नहीं हैं, लेकिन जब तक प्रशासन अपनी भूल सुधार कर चारों शंकराचार्यों के लिए स्नान का सम्मानजनक प्रोटोकॉल तय नहीं करता, वे माघी पूर्णिमा तक इसी तरह पालकी पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराते रहेंगे।


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