समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान से जुड़े बहुचर्चित डूंगरपुर प्रकरण में मंगलवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई। दोपहर दो बजे से शुरू हुई यह न्यायिक प्रक्रिया शाम पांच बजे तक चली। अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने तर्क रखे, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई 2026 की तारीख मुकर्रर की है।

अदालत में पेश की गई गांवों की सूची

​मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी और सपा नेता आजम खान के अधिवक्ता की ओर से संबंधित गांवों की एक विस्तृत सूची अदालत के समक्ष पेश की गई। बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को विशेष अदालत ने गंभीरता से लेते हुए आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर ले लिया है। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच चली लंबी दलीलों के बाद अदालत ने आगामी कार्रवाई के लिए 30 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।

क्या है पूरा डूंगरपुर प्रकरण?

​यह पूरा मामला वर्ष 2016 का है, जब रामपुर के डूंगरपुर बस्ती में गरीबों के लिए बने आवासों और बस्तियों को खाली कराए जाने की कार्रवाई की गई थी। इस दौरान स्थानीय लोगों द्वारा प्रशासन और सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि बस्ती खाली कराने के नाम पर बड़े पैमाने पर मारपीट, लूटपाट, और घरों में तोड़फोड़ की गई थी।

​पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर रामपुर के गंज थाने में आजम खान और अन्य कई नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे। इस प्रकरण में पुलिस द्वारा लंबी जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिस पर वर्तमान में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में सुनवाई चल रही है।


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अब तक की कानूनी कार्रवाई

​डूंगरपुर मामले से जुड़े विभिन्न मुकदमों में निचली अदालत की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पूर्व में भी इस प्रकरण से जुड़े कुछ मामलों में अदालत के फैसले आ चुके हैं। इसके अलावा, कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल में बंद पूर्व मंत्री आजम खान के बयान भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए जा चुके हैं।

​चूंकि यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और रामपुर के चर्चित मामलों में शुमार है, इसलिए इस पर शासन-प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की भी पैनी नजर बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि 30 जुलाई को होने वाली आगामी सुनवाई में अदालत क्या नया रुख अपनाती है और दोनों पक्षों की तरफ से क्या दलीलें दी जाती हैं।

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