देश के प्रमुख हेल्थकेयर नेटवर्क पार्क हॉस्पिटल ग्रुप और उससे जुड़े चिकित्सा संस्थानों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की संयुक्त टीमों द्वारा शुरू की गई मैराथन कार्रवाई 50 घंटे से भी अधिक का समय पार कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा से सटे इलाकों सहित कुल 17 प्रमुख ठिकानों पर जांच टीमें लगातार डटी हुई हैं। गुरुग्राम स्थित कॉर्पोरेट मुख्यालय से लेकर फरीदाबाद, मोहाली, पटियाला, बठिंडा, बहरोड़ और यूपी के रामपुर जिले के बिलासपुर तक फैली इस छापेमारी से चिकित्सा और कारोबारी जगत में भारी हलचल मची हुई है।
सोमवार सुबह से चल रही कार्रवाई
कार्रवाई का बड़ा असर उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बिलासपुर में उत्तराखंड बॉर्डर से सटी पॉश बत्रा कॉलोनी में देखने को मिला। सोमवार तड़के करीब 5 बजे 12 से 15 चार पहिया वाहनों के काफिले के साथ केंद्रीय जांच एजेंसियों की टीमें यहां दाखिल हुईं थी। टीम ने इलाके के प्रमुख कारोबारी रोहताश बत्रा और मेडिसिटी अस्पताल के पूर्व संचालक डॉ. दीपक छाबड़ा के आवासों को चारों तरफ से घेर लिया। इसी दौरान रोहताश बत्रा की मॉर्निंग वॉक और डॉ. दीपक छाबड़ा को जिम से हिरासत में लिया गया था। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए दोनों परिसरों के मुख्य गेट भीतर से बंद करा दिए गए और किसी भी बाहरी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। जांच के दौरान अधिकारियों के वाहनों को आर्क होटल के पास भी देखा गया था, जिससे स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर पर भी जांच का दायरा काफी बड़ा है।
पार्क ग्रुप पहले से एजेंसियों के रडार पर
स्थानीय स्तर पर इस छापेमारी के तार मेडिसिटी अस्पताल के हालिया सौदे से सीधे जुड़े बताए जा रहे हैं। रोहताश बत्रा और डॉ. दीपक छाबड़ा मेडिसिटी हॉस्पिटल में साझेदार थे। जानकारी के मुताबिक, कुछ ही समय पहले इस अस्पताल का संचालन पार्क ग्रुप को सौंपा गया था। सूत्रों के अनुसार पार्क ग्रुप पहले से ही बड़े पैमाने पर कर चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियों की रडार पर था। ऐसे में माना जा रहा है कि मेडिसिटी के अधिग्रहण के दौरान हुए भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन, कागजी मूल्यांकन और फंड के स्रोतों की पड़ताल के तहत ही बिलासपुर में यह कार्रवाई की गई। टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस सौदे में अघोषित नकदी का लेन-देन हुआ या कागजों में हेराफेरी कर टैक्स छिपाने का प्रयास किया गया।
कई गुना बड़ा रूप ले सकता है घोटाला
शुरुआती सूत्रों के अनुसार, यह जांच 20 करोड़ रुपये से अधिक की कथित कर चोरी और फर्जी बिलिंग के इनपुट से शुरू हुई थी। लेकिन जिस तरह से 5 राज्यों में 17 ठिकानों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में अधिकारी दिन-रात दस्तावेज खंगाल रहे हैं, उससे साफ है कि मामला सिर्फ शुरुआती कर चोरी तक सीमित नहीं है। सबसे गंभीर आरोप केंद्र सरकार की 'आयुष्मान भारत योजना' और पूर्व सैनिकों के लिए संचालित 'ईसीएचएस' स्वास्थ्य योजना के तहत फर्जीवाड़े का है। आरोप है कि फर्जी मरीजों के नाम और जाली दस्तखत के जरिए सरकारी योजनाओं से भारी-भरकम क्लेम पास कराए गए। आशंका जताई जा रही है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने पर यह घोटाला कई गुना बड़ा रूप ले सकता है। जांच टीमें अस्पतालों और आवासों से कंप्यूटर सर्वर, लैपटॉप, खातों की मूल बहियों और प्रशासनिक दस्तावेजों को कब्जे में लेकर खंगाल रही हैं।
चार राज्यों में पसरा सन्नाटा
हरियाणा के गुरुग्राम में कॉर्पोरेट ऑफिस, फरीदाबाद के सेक्टर-10 अस्पताल, पंजाब के मोहाली, पटियाला, बठिंडा और राजस्थान के बहरोड़ स्थित पार्क अस्पताल में रिकॉर्ड की बारीक जांच चल रही है। 50 घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी डिजिटल डेटा, बैंक लेन-देन की कड़ियों और कागजी साक्ष्यों की पूरी जब्ती व मिलान के बाद ही स्थिति साफ होगी। खबर लिखे जाने तक बिलासपुर में डॉक्टर छाबड़ा व उनके बिजनेस पार्टनर के आवास और अन्य राज्यों में स्थित अस्पतालों में पड़ताल का सिलसिला जारी है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध जानकारी और सूत्रों के हवाले से सामने आए तथ्यों पर आधारित है। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किसी भी आरोप की पुष्टि आधिकारिक जांच या सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्षों से ही मानी जानी चाहिए।
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