गाजियाबाद, 25 अक्टूबर। गाजियाबाद में यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक पाने वाली 1000 मेधावी छात्राओं के सम्मान समारोह को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि साइकिल वितरण कार्यक्रम से ठीक पहले प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर से टेंट और मंच को हटा दिया। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
एसीपी दफ्तर में बैठाने का आरोप
सपा नेता अनुज प्रधान का दावा है कि दिन के समय पुलिस ने उन्हें एसीपी दफ्तर बुलाकर कई घंटों तक बैठाए रखा। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें कार्यक्रम को लेकर तरह-तरह से दबाव में लेने का प्रयास किया गया। इसके बाद रात के समय प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ आयोजन स्थल पर पहुंची।
रात में मंच हटाने की कार्रवाई
आयोजकों के अनुसार रात के वक्त कार्यक्रम स्थल पर बुलडोजर चलाकर वहां लगा टेंट, कुर्सियां और मंच पूरी तरह हटा दिया गया। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें वहां से हटने की चेतावनी दी गई। सोशल मीडिया पर भी इस घटना से जुड़े कथित वीडियो सामने आए हैं, जिनमें आयोजन स्थल से सामान हटाए जाने का दावा किया जा रहा है।
क्षेत्रीय भाजपा विधायक पर आरोप
सपा नेता अनुज प्रधान ने सीधा आरोप लगाया है कि यह पूरी कार्रवाई स्थानीय भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर के राजनीतिक दबाव के चलते कराई गई है। सपा नेताओं का कहना है कि छात्राओं की मदद और प्रोत्साहन के इस आयोजन से सत्ता पक्ष असहज था, जिसके कारण प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की गई।
साइकिल वितरण के फैसले पर अडिग
प्रशासनिक सख्ती और मंच हटाए जाने के बावजूद सपा नेता ने साफ किया है कि छात्राओं को साइकिल वितरण का कार्यक्रम हर हाल में किया जाएगा। उनका कहना है कि बेटियों के सम्मान से जुड़े इस प्रयास को किसी भी दबाव में नहीं रोका जाएगा।
अनुमति के अभाव या नियमों की अनदेखी
दूसरी तरफ प्रशासनिक हलकों के जानकारों के अनुसार किसी भी बड़े सार्वजनिक आयोजन, भीड़ जुटाने और टेंट लगाने के लिए सक्षम स्तर से विधिवत अनुमति लेना जरूरी होता है। अनुमति के अभाव या नियमों की अनदेखी की स्थिति में ही प्रशासन इस तरह के कदम उठाता है। घटना के बाद इलाके में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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