गाजियाबाद पुलिस इन दिनों अपनी एक 'हाइटेक जांच' को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर कौशांबी पुलिस का एक वीडियो जंगल की आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मी एक शख्स की पीठ पर मोबाइल फोन सटाकर यह 'चेक' करते दिख रहे हैं कि वह भारतीय है या बांग्लादेशी। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट्स की बाढ़ ला दी और पुलिस की इस 'जादुई तकनीक' पर जमकर तंज कसे।
वीडियो में क्या है? जिस पर मचा बवाल
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी झुग्गी में रहने वाले एक व्यक्ति से पूछताछ कर रहे हैं।
पुलिस: "बांग्लादेश से तो नहीं हो?"
शख्स: "नहीं साहब।"
इसके बाद एक पुलिसकर्मी दूसरे से कहता है— "मशीन लगाओ इसकी पीठ पर।" पुलिसकर्मी अपना मोबाइल फोन शख्स की पीठ पर लगाता है और कुछ सेकंड बाद कहता है— "मशीन तो इसे बांग्लादेशी बता रही है।"
सोशल मीडिया पर भिड़े यूजर्स: 'इस तकनीक को नोबेल मिलना चाहिए'
वीडियो वायरल होते ही 'एक्स' (X) पर यूजर्स ने कमेंट्स के जरिए गाजियाबाद पुलिस की खिंचाई शुरू कर दी:
- एक यूजर ने तंज कसा: "इस मशीन को तो तुरंत बॉर्डर पर लगा देना चाहिए, पासपोर्ट-वीजा की जरूरत ही खत्म हो जाएगी।"
- दूसरे ने लिखा: "गाजियाबाद पुलिस ने तो गूगल और नासा को भी पीछे छोड़ दिया। मोबाइल अब 'सिटिजनशिप डिटेक्टर' बन गया है।"
- एक अन्य कमेंट आया: "गरीबों को डराने का यह नया तरीका है क्या? मजाक की भी एक सीमा होती है।"
हालांकि, कुछ यूजर्स ने पुलिस का समर्थन करते हुए इसे 'मनोवैज्ञानिक दबाव' (Psychological Pressure) बनाने का तरीका बताया ताकि संदिग्ध सच उगल दे।
वायरल वीडियो लिंक
पुलिस की सफाई: 'मजाक नहीं, सत्यापन था'
मामला सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड बनने लगा तो गाजियाबाद पुलिस ने सफाई दी। पुलिस का कहना है कि यह नियमित सत्यापन (Verification) का हिस्सा था। अपराध नियंत्रण के लिए समय-समय पर झुग्गियों में रहने वाले संदिग्धों के दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत कौशांबी पुलिस टीम वहां पहुंची थी।
पड़ताल: 'मशीन' या मोबाइल?
हमारी पड़ताल में सामने आया कि पुलिस के हाथ में कोई विशेष मशीन नहीं, बल्कि उनका स्मार्टफोन ही था। पुलिस अक्सर अपराधियों का डेटाबेस चेक करने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करती है, लेकिन नागरिकता जांचने के लिए इस तरह फोन को शरीर से सटाना किसी भी नियम पुस्तिका (Manual) का हिस्सा नहीं है।
---समाप्त---