नई दिल्ली, 20 अक्टूबर। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देशभर में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, सौभाग्य और सफलता की कामना की है। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी दशहरे की पूर्व संध्या पर देशवासियों को बधाई देते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए देशवासियों को विजयादशमी की बधाई दी। उन्होंने लिखा, "आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं। उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है।"
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विजयादशमी को उल्लास और विश्वास का पर्व बताते हुए लोगों के संकल्प को नई शक्ति मिलने की कामना की।
राष्ट्रपति का विकसित भारत के निर्माण का आह्वान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार, 19 अक्टूबर को दशहरे की पूर्व संध्या पर देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इस त्योहार का विशेष महत्व है। भगवान श्रीराम को धर्म और नैतिक आचरण का आदर्श माना जाता है। यह पर्व अधर्म और अन्याय पर धर्म तथा न्याय की विजय का संदेश देता है। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर लोगों से नैतिक मूल्यों और कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने का आह्वान भी किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने शुभकामना संदेश में भारतीय संस्कृति और उसके उच्च आदर्शों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों पर आधारित है।
राष्ट्रपति ने देशवासियों से अपील की कि वे भगवान श्रीराम की विजय के इस पर्व पर अपनी सांस्कृतिक विरासत के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लें।
उन्होंने विकसित भारत और समावेशी समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक से योगदान देने का आह्वान किया। राष्ट्रपति का संदेश समाज में नैतिकता, न्याय और कर्तव्य के महत्व को दर्शाता है।
देशभर में दशहरे का उत्साह
विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व सत्य, धर्म और न्याय की विजय का प्रतीक है।
मान्यता है कि श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध किया था। वहीं, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की परंपरा भी इस पर्व से जुड़ी है। उत्तर भारत में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा प्रमुख है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में देवी दुर्गा की आराधना और विजयादशमी से जुड़े अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। विजयादशमी का पर्व लोगों को सत्य, न्याय और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
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