नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। दिल्ली के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) ने सोमवार को दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। दिल्ली पुलिस ने उनकी रिहाई से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताते हुए हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। दोनों नेता अब 21 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में रहेंगे। इससे पहले उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

पांच दिन की हिरासत पूरी

सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों पर बिना अनुमति प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने और पहले भरे गए शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दोनों नेताओं ने प्रतिबंधित प्रदर्शन क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास किया था। पुलिस ने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

पुलिस ने जताई शांति भंग की आशंका

पांच दिन की हिरासत अवधि पूरी होने पर सोमवार को दोनों नेताओं का मामला मंदिर मार्ग थाने स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष आया। दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि रिहाई के बाद दोनों नेता दोबारा विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इसी आधार पर पुलिस ने उनकी हिरासत अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। मजिस्ट्रेट ने फिलहाल दो दिन की बढ़ोतरी मंजूर की। इस फैसले के बाद दोनों नेताओं की रिहाई की उम्मीद लगाए बैठे पार्टी कार्यकर्ताओं को फिर इंतजार करना पड़ेगा।

पार्टी ने उठाए सवाल

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने पर नाराजगी जताई है। पार्टी का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया में देरी कर रहा है। पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। वहीं पुलिस का पक्ष है कि पहले से तय शर्तों का उल्लंघन होने के कारण कार्रवाई की गई। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। फिलहाल पार्टी अपने नेताओं की रिहाई के लिए कानूनी रास्ता अपना रही है।


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मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने का मामला

इस मामले में एक और जानकारी सामने आई है। दोनों नेताओं की जमानत से जुड़ी सुनवाई के दौरान स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी मिलने की शिकायत की गई थी। इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (एनसीआर) दर्ज की है। धमकी के कारण सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, धमकी किसने दी और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस इस मामले की अलग से जांच कर रही है।

अब 21 अक्टूबर पर नजर

सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ने के बाद अब पार्टी समर्थकों की नजर 21 अक्टूबर की अगली कानूनी कार्यवाही पर टिकी है। पार्टी के नेता दोनों की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जबकि दिल्ली पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दलील दे रही है। दोनों नेताओं को आगे राहत मिलेगी या उनकी हिरासत फिर बढ़ेगी, यह अगली कार्यवाही में तय होगा। फिलहाल वे तिहाड़ जेल में ही रहेंगे।

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