गणतंत्र के उत्सव के बीच बिलासपुर की सड़कों पर आज एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। जब पूरा देश तिरंगे को नमन कर रहा था, तब बिलासपुर का अन्नदाता अपने ट्रैक्टरों की स्टेयरिंग थामकर सड़कों पर उतर आया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस रैली में किसानों का जोश देखते ही बन रहा था। सोमवार दोपहर बारह बजे के करीब केमरी तिराहे के पास किसान यूनियन के कार्यालय पर भीड़ जुटना शुरू हुई। देखते ही देखते सैकड़ों ट्रैक्टरों का काफिला जमा हो गया, जो अपनी मांगों को लेकर सरकार की खामोशी के खिलाफ एक गर्जना थी।
कंबाइन की अगुवाई और तिरंगे की आन
इस विशाल प्रदर्शन की सबसे खास बात यह थी कि रैली का नेतृत्व एक विशाल कंबाइन मशीन कर रही थी, जो कृषि जगत की शक्ति का प्रतीक बनी। जिलाध्यक्ष जगजीत सिंह गिल ने जब हरी झंडी दिखाकर इस काफिले को रवाना किया, तो हवा में 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' के नारे गूंजने लगे। हर ट्रैक्टर पर लहराता तिरंगा और यूनियन का झंडा इस बात की गवाही दे रहा था कि किसान देशप्रेम और अपने अधिकारों की लड़ाई को एक साथ लेकर चल रहा है। यह महज एक रैली नहीं थी, बल्कि उन वादों का हिसाब मांगने का एक जरिया थी जो सत्ता के गलियारों में कहीं धूल फांक रहे हैं।
प्रशासन की मुस्तैदी और शांतिपूर्ण संदेश
रैली शुरू होने से पहले उप जिलाधिकारी अरुण कुमार ने स्वयं किसान नेताओं से संवाद किया ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। किसानों ने भी अनुशासन का परिचय देते हुए नेशनल हाईवे और नगर के प्रमुख रास्तों से अपना काफिला गुजारा। जिलाध्यक्ष गिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान इस गणतंत्र को पूरे उत्साह से मना रहे हैं, लेकिन उनकी खुशी तब पूरी होगी जब सरकार किसानों से किए गए समझौतों को जमीन पर लागू करेगी। रैली में जिला संयोजक गुरचरण सिंह सिद्धू, जिला प्रवक्ता नृपजीत सिंह, ब्लॉकाध्यक्ष सर्वजोत सिंह चीमा, प्यारा सिंह, अंतराम यादव, निशान सिंह औलख, सुखदेव सिंह, साहब सिंह चीमा, लखवीर सिंह और परमजीत सिंह जैसे दिग्गजों के साथ सैकड़ों हाथों ने एकता का संकल्प लिया।
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